कुंदन कुमार, पटना। इस बार का केंद्र पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का आगामी विधान परिषद (MLC) चुनाव है। पार्टी के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है, जिसकी बानगी मोकामा क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों में साफ तौर पर देखने को मिल रही है। जदयू के भीतर मची इस खींचतान ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
मैदान में दिग्गजों की आमने-सामने की स्थिति
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जदयू के मौजूदा विधान पार्षद (MLC) नीरज कुमार एक बार फिर चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। पार्टी की ओर से उन्हें मजबूत दावेदार माना जा रहा है। हालांकि, उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनों की नाराजगी से पार पाने की है। मोकामा क्षेत्र के बाहुबली विधायक अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच दूरियां जगजाहिर हो चुकी हैं। यह नाराजगी अब खुलकर सतह पर आने लगी है, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
मान-मनौव्वल की कोशिशें हुईं नाकाम
पार्टी के भीतर बढ़ती इस कलह को थामने के लिए जदयू नेतृत्व ने शुरुआती स्तर पर सक्रियता दिखाई थी। कुछ दिनों पहले ही जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने पार्टी कार्यालय में एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई थी। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य विधायक अनंत सिंह को मनाना और पार्टी उम्मीदवार के पक्ष में एकजुटता का संदेश देना था। लेकिन प्रदेश अध्यक्ष के तमाम प्रयासों के बावजूद इसका कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया। अनंत सिंह का रुख अब भी नरम नहीं पड़ा है और वह नीरज कुमार के समर्थन से साफ इनकार करते नजर आ रहे हैं।
अनंत सिंह का तीखा तेवर और नया समीकरण
मीडिया से बातचीत के दौरान विधायक अनंत सिंह ने अपनी स्थिति को बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने दो टूक अंदाज में कहा है कि इस तरह के एमएलसी चुनावों में पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक सिंबल नहीं दिया जाता है। उन्होंने आगे कहा कि जो व्यक्ति या उम्मीदवार क्षेत्र में बेहतर काम करेगा, वह उसी का समर्थन करेंगे। उनका पूरा समर्थन उसी के साथ है जो धरातल पर अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बयान के जरिए अनंत सिंह ने पार्टी लाइन से हटकर अलग राह पकड़ ली है। वह एक तरह से मैदान में अपने खुद के प्रत्याशी को उतारने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। इतना ही नहीं, वह इस चुनाव में अनुज सिंह का खुलकर साथ देते हुए नजर आ रहे हैं, जिससे मोकामा और पटना की राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज हो गई है।
पार्टी के लिए बड़ी चुनौती
एक तरफ जहां जदयू इस सीट पर अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के भीतर के ऐसे विरोधाभास चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। बाहुबली विधायक का पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ जाना और वैकल्पिक समर्थन तलाशना संगठन के लिए चिंता का विषय है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि पार्टी आलाकमान इस आंतरिक कलह को सुलझाने के लिए क्या नया कदम उठाता है या फिर यह बगावत चुनाव में एक बड़ा राजनीतिक मोड़ लेकर आती है।



