पटना। बिहार की राजनीति में एक नए युग की पटकथा लिखी जा चुकी है। शपथ ग्रहण के महज 24 घंटे के भीतर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपनी कार्यशैली से स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सरकार ‘सुशासन’ और ‘रफ्तार’ के मंत्र पर चलेगी। गुरुवार की सुबह सचिवालय पहुंचते ही गलियारों में हलचल तेज हो गई। मुख्यमंत्री ने कमान संभालते ही विभिन्न विभागों के प्रधान सचिवों के साथ मैराथन बैठक की। इस बैठक का मुख्य एजेंडा न केवल सरकारी योजनाओं की समीक्षा करना था, बल्कि आगामी लक्ष्यों के लिए एक रोडमैप तैयार करना भी रहा।
डिप्टी सीएम की सक्रियता और नई ‘त्रिमूर्ति’
सचिवालय में मुख्यमंत्री के साथ-साथ उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने भी अपना कार्यभार आधिकारिक रूप से संभाल लिया है। पदभार संभालते ही उन्होंने अधिकारियों से लंबित फाइलों और विभागीय फीडबैक की मांग की। राज्य की इस नई सत्ता संरचना में सम्राट चौधरी, विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव की जोड़ी एक ‘त्रिमूर्ति’ के रूप में उभर रही है, जो मंत्रिमंडल के पूर्ण विस्तार तक सरकार के पहिए को गति देगी।
जिम्मेदारियों का बंटवारा
फिलहाल बिहार कैबिनेट का पूर्ण विस्तार होना शेष है, इसलिए प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए विभागों का अंतरिम आवंटन किया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद गृह मंत्रालय समेत 29 महत्वपूर्ण विभागों की कमान अपने पास रखी है। वहीं, अनुभवी विजय चौधरी को 10 और कद्दावर नेता बिजेंद्र यादव को 8 महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
रोहिणी आचार्या के गंभीर आरोप
सत्ता परिवर्तन के बीच सियासी पारा भी चढ़ा हुआ है। लालू प्रसाद यादव की पुत्री रोहिणी आचार्या ने सम्राट चौधरी की नियुक्ति पर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पद पर एक ऐसे व्यक्ति को बैठाया गया है जिनका अतीत विवादों से भरा है। रोहिणी ने उनके शैक्षणिक दस्तावेजों, जन्मतिथि और यहां तक कि पुराने आपराधिक दागों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिससे आने वाले दिनों में सियासी टकराव और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- उत्तर प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- लल्लूराम डॉट कॉम की खबरें English में पढ़ने यहां क्लिक करें
- खेल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
- मनोरंजन की बड़ी खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें

