चंडीगढ़। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने किशोरियों में माहवारी स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से राज्यभर के सरकारी स्कूलों में एक विशेष शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू किया है। यह पहल अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संस्था वॉश यूनाइटेड के सहयोग से लागू की जा रही है, जो मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत है।
कार्यक्रम के तहत “मेनस्ट्रुअल हाइजीन मैनेजमेंट” नामक विशेष पाठ्यक्रम तैयार किया गया है, जिसे पंजाबी भाषा में विकसित किया गया है ताकि छात्राएं विषय को आसानी से समझ सकें। इसके अंतर्गत स्कूलों में विशेष कक्षा सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें माहवारी से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी, स्वच्छता और स्वयं की देखभाल के बारे में जागरूक किया जाएगा।
पाठ्यक्रम में 10 वर्षीय बालिका रूबी की कहानी को मुख्य पात्र के रूप में शामिल किया गया है। इसके साथ ही चर्चा, समूह गतिविधियों और सहभागिता आधारित शिक्षण पद्धतियों को जोड़ा गया है, जिससे छात्राएं बिना झिझक विषय को समझ सकें और अपने अनुभव साझा कर सकें। कार्यक्रम का उद्देश्य माहवारी से जुड़े मिथकों को दूर करना, आत्मविश्वास बढ़ाना और विद्यालयों में सहयोगी वातावरण तैयार करना है।
इस पहल के सफल संचालन के लिए राज्य सरकार ने लगभग 7,200 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया है। यह कार्यक्रम तीन चरणों वाले संरचित मॉडल पर आधारित है, जिसमें कहानी-आधारित शिक्षण और आयु के अनुरूप स्वास्थ्य शिक्षा शामिल की गई है।
सरकार ने पहले करीब 100 स्टेट रिसोर्स पर्सन्स को मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया और फिर जिला स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से हजारों शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया। अधिकारियों के अनुसार, इस प्रशिक्षण से कक्षाओं में ऐसा सुरक्षित माहौल तैयार होगा, जहां छात्राएं बिना किसी डर या संकोच के अपने सवाल पूछ सकेंगी।
इस कार्यक्रम को राज्यभर में लागू करने से पहले पंजाब के सभी 23 जिलों के 100 से अधिक सरकारी स्कूलों में एक पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था, जिसमें 45 हजार से अधिक छात्राओं ने भाग लिया। पायलट के नतीजे बेहद उत्साहजनक रहे।
सरकार के अनुसार, पायलट कार्यक्रम में शामिल 97 प्रतिशत शिक्षकों ने कहा कि वे नए पाठ्यक्रम के माध्यम से माहवारी संबंधी शिक्षा देने में सहज महसूस करते हैं। वहीं 94 प्रतिशत शिक्षकों ने इस कार्यक्रम को पूरे राज्य में लागू करने की सिफारिश की। लगभग 88 प्रतिशत शिक्षकों ने इसे पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक प्रभावी और सरल बताया, जबकि 80 प्रतिशत शिक्षकों ने छात्राओं की सक्रिय भागीदारी दर्ज की।
फरीदकोट की अध्यापिका जसप्रीत कौर ने कहा कि यह पाठ्यक्रम लड़कियों के लिए एक सुरक्षित वातावरण तैयार करता है, जहां वे अपने सवाल पूछ सकती हैं और माहवारी से जुड़े भ्रमों को दूर कर सकती हैं। उन्होंने बताया कि कहानियों, खेलों और दृश्य सामग्रियों के माध्यम से सीखने की प्रक्रिया अधिक सहज और प्रभावशाली बनती है।
अमृतसर की अध्यापिका मोनिका सूद ने कहा कि छात्राओं ने सत्रों में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया और खुलकर बताया कि उनके घरों और समुदायों में माहवारी को किस नजरिए से देखा जाता है। उन्होंने कहा कि सही जानकारी का अभाव किशोरियों के स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है, जबकि यह कार्यक्रम उन्हें अपने शरीर को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है।
मोगा की अध्यापिका सिल्वी के अनुसार, कार्यक्रम के बाद न केवल छात्राएं बल्कि कई अध्यापिकाएं भी माहवारी जैसे विषयों पर खुलकर चर्चा करने लगी हैं, जिससे जागरूकता और आत्मविश्वास दोनों बढ़े हैं।
कार्यक्रम में शामिल छात्राओं ने भी सकारात्मक अनुभव साझा किए। संगरूर की नौवीं कक्षा की छात्रा कोमल प्रीत कौर ने कहा कि इन सत्रों से उसका आत्मविश्वास बढ़ा है और उसे समझ आया कि माहवारी एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है। वहीं मोगा की छात्रा डिंपल रानी ने बताया कि उसने सत्र में सीखी गई बातें घर जाकर अपनी मां के साथ साझा कीं। दसवीं कक्षा की छात्रा तनीशा ने कहा कि इस पाठ्यक्रम ने लड़कियों को बिना शर्म के अपनी बात रखने का अवसर दिया है।
अधिकारियों का कहना है कि यह पहल केवल माहवारी स्वास्थ्य जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि किशोरियों के लिए अधिक संवेदनशील, समावेशी और सहयोगी शिक्षा वातावरण तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का मानना है कि इससे छात्राओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और आत्मविश्वास को मजबूती मिलेगी तथा एक जागरूक और सशक्त युवा पीढ़ी तैयार होगी।
यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र में किए जा रहे व्यापक सुधारों का हिस्सा है, जिसके तहत सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे, शिक्षक प्रशिक्षण, विद्यार्थियों के कल्याण और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
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