कुंदन कुमार, पटना। बिहार में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर बक्सर से राजद सांसद सुधाकर सिंह ने नीतीश कुमार और मौजूदा भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि बिहार में भ्रष्टाचार को संस्थागत रूप देने के लिए अलग-अलग विभागों के भीतर कॉर्पोरेशन बनाए गए और विकास से जुड़े बजट को इन कॉर्पोरेशनों के माध्यम से खर्च किया जा रहा है।
राजद सांसद ने स्वास्थ्य विभाग का उदाहरण देते हुए बीएमएसआईएल में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़ी मशीनों की खरीद और उनके संचालन के नाम पर बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी हुई है। उन्होंने सीबीआई जांच के अधिकार और बिहार में भ्रष्टाचार के मामलों की जांच को लेकर भी सवाल उठाए। आरोप लगाया कि जब केंद्र और बिहार में एक ही गठबंधन की सरकार है, तो फिर सीबीआई पर भरोसा क्यों नहीं किया जा रहा?
सुधाकर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह भी सवाल उठाया कि अगर विभागों के बजट और विकास कार्यों का बड़ा हिस्सा कॉर्पोरेशनों के जरिए संचालित होगा, तो उनकी जवाबदेही आखिर किसकी होगी? हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए इन आरोपों पर संबंधित सरकार या विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया इस बयान में शामिल नहीं है।
राजद सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार के स्वास्थ्य विभाग में खरीदारी को लेकर विपक्ष ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया गया कि बीएमएसआईसीएल के माध्यम से खरीदे गए कई सामानों की कीमत बाजार दर से कई गुना अधिक दिखाई गई। आरोप है कि जिस डिब्बे की क्षमता 75 लीटर बताई गई, उसे पानी भरकर नापने पर करीब 60 लीटर पाया गया। वहीं, करीब 8 से 10 रुपये के प्लास्टिक आइटम की खरीद कथित तौर पर 109 रुपये में किए जाने का दावा किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि टेंडर की शर्तों में बदलाव कर OEM यानी Original Equipment Manufacturer की अनिवार्यता हटा दी गई, जिससे बिचौलियों या अन्य कंपनियों के लिए सामान सप्लाई करने का रास्ता खुल गया। दावा किया गया कि यदि इस सामान की अलग से खरीद प्रक्रिया होती तो सरकारी खजाने को बड़ी रकम की बचत हो सकती थी।
इस दौरान सुधाकर सिंह ने मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़ी मशीनों की खरीद पर भी सवाल उठाए गए। आरोप लगाया कि करीब एक करोड़ रुपये कीमत वाली मशीन को लगभग 18 लाख रुपये में टेंडर किया गया, लेकिन जिन स्थानों पर मशीन लगाए जाने की बात कही गई, वहां मशीन के मौजूद नहीं होने के भी सवाल उठाए गए।
उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ जिलों में मशीन पहुंचने और उसके इस्तेमाल को लेकर रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में अंतर है। सवाल उठाया गया कि अगर मशीनें खरीदी और भुगतान किया गया, तो वे वर्तमान में कहां हैं और उनका इस्तेमाल क्यों नहीं हो रहा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री की भूमिका को लेकर भी दस्तावेजों का हवाला देते हुए सवाल उठाए गए। दावा किया गया कि 10 लाख रुपये से अधिक कीमत वाले किसी एक उपकरण की खरीद से संबंधित फाइल विभागीय स्तर पर जाती है और संबंधित मामले में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री के हस्ताक्षर होने की बात कही गई।
सुधाकर सिंह ने यह मांग की कि स्वास्थ्य विभाग और बीएमएसआईसीएल में हुई कथित खरीद अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए। हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए इन आरोपों पर संबंधित विभाग, बीएमएसआईसीएल या जिन अधिकारियों/मंत्रियों का नाम लिया गया है, उनका पक्ष इस बयान में शामिल नहीं है।
राष्ट्रीय जनता दल ने स्वास्थ्य विभाग और बीएमएसआईसीएल में कथित भ्रष्टाचार को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया गया कि दरभंगा के महारानी राजेश्वरी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के निर्माण में आईआईटी पटना की जांच में बीम और कॉलम को सब-स्टैंडर्ड बताया गया था, फिर भी रिपोर्ट आने से पहले ही निर्माण कंपनी को भुगतान कर दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट मशीनों की खरीद में मशीन की कीमत कम दिखाई गई, जबकि उसकी एक्सेसरीज़ पर लगभग 300 करोड़ रुपये खर्च किए गए। यह भी दावा किया गया कि कई अस्पतालों में मशीनें लगी ही नहीं हैं, ऐसे में एक्सेसरीज़ की खरीद पर सवाल उठता है। राजद ने सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। वहीं, इन आरोपों पर सरकार या संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है।
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