पटना। बिहार में उच्च शिक्षा और शोध को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्यपाल-सह-कुलाधिपति की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था को मजबूत बनाने और शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में निर्णय लिया गया कि राज्य में कुलाधिपति पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप, मुख्यमंत्री शोध अनुदान योजना और मुख्यमंत्री शोध छात्रवृत्ति योजना लागू की जाएगी। इन योजनाओं का उद्देश्य शोध कार्यों को प्रोत्साहित करना और विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही सभी विश्वविद्यालयों को 30 सितंबर तक छात्रों की लंबित डिग्रियां जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्यपाल ने शिक्षकों और कर्मचारियों के स्थानांतरण तथा पदोन्नति की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामान्य स्थानांतरण केवल जून महीने में ही किए जाएंगे।
बैठक में कई मुद्दों पर की गई चर्चा
बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि स्नातकोत्तर के 43 विषयों के नए पाठ्यक्रमों को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है, जिन्हें जुलाई के पहले सप्ताह तक मंजूरी मिलने की संभावना है। साथ ही, बिहार के उच्च शिक्षा अधिनियम में सुधार के लिए 15 राज्यों के शिक्षा कानूनों का अध्ययन कर बेहतर प्रावधान शामिल किए जाएंगे।
राज्यपाल ने 31 दिसंबर 2026 तक सभी विश्वविद्यालयों में समर्थ पोर्टल पूरी तरह लागू करने का निर्देश दिया। इस पोर्टल के जरिए वित्त, लेखा, कर्मचारी सेवाएं और अकादमिक कार्यों सहित 26 मॉड्यूल डिजिटल तरीके से संचालित होंगे, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता और कार्यक्षमता बढ़ेगी।
इसके अलावा 211 प्रखंडों में स्थापित होने वाले नए डिग्री कॉलेजों के लिए संविदा के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। बेहतर वेतनमान के साथ प्रत्येक उच्च शिक्षण संस्थान में हर वर्ष कम से कम एक फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि शिक्षकों के कौशल और शिक्षण गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो सके।

