Bihar news: बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने स्थानांतरण-पदस्थापन के क्षेत्र में एक नई और पारदर्शी कार्यसंस्कृति की नींव रखी है। विभाग ने पहली बार पूरी तरह से तकनीक आधारित व्यवस्था अपनाते हुए 3,268 राजस्व कर्मचारियों का तबादला किया है, जिसमें मानवीय हस्तक्षेप को पूरी तरह शून्य रखा गया।
पारदर्शिता और तकनीक का अनूठा मेल
विभागीय मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल की विशेष अनुशंसा पर मंगलवार को यह स्थानांतरण सूची जारी की गई। इस पूरी प्रक्रिया को बिहार भूमि पोर्टल के माध्यम से संचालित किया गया जहां कर्मचारियों से ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। मंत्री ने स्पष्ट किया कि तकनीक के उपयोग से अब स्थानांतरण प्रक्रिया न केवल पारदर्शी बनी है बल्कि इसने व्यवस्था के प्रति कर्मचारियों के भरोसे को भी मजबूत किया है। भविष्य में अन्य श्रेणी के सरकारी सेवकों के लिए भी इसी मॉडल को अपनाया जाएगा।
प्राथमिकताओं का रखा गया विशेष ध्यान
स्थानांतरण में पूरी तरह से निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने कुछ स्पष्ट प्राथमिकताएं तय की थीं:
- दूरी: कार्यस्थल की दूरी को सबसे प्रमुख आधार बनाया गया।
- विशेष वर्ग: महिला कर्मचारियों, पति-पत्नी (एक ही स्थान पर पोस्टिंग), गंभीर बीमारी से जूझ रहे कर्मचारियों और दिव्यांगजनों को वरीयता सूची में रखा गया।
आंकड़ों में स्थानांतरण की स्थिति
सचिव जय सिंह ने जानकारी दी कि कुल 3,268 कर्मचारियों में 3,142 पुरुष और 126 महिला कर्मचारी शामिल हैं। नई व्यवस्था की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1,712 पुरुष और 108 महिला कर्मचारियों को उनकी प्रथम वरीयता वाला स्थान प्राप्त हुआ है। इसके अतिरिक्त:
- 380 कर्मचारियों को उनकी द्वितीय वरीयता मिली।
- 141 कर्मचारियों को तीसरी वरीयता के अनुसार पदस्थापित किया गया।
- 880 कर्मचारियों को उनके गृह जिले के निकटवर्ती जिलों में तैनाती दी गई है।
अमीनों का भी होगा तबादला
इस सफल प्रयोग के बाद विभाग अब आत्मविश्वास से भरा हुआ है। सचिव ने संकेत दिए कि इसी पारदर्शी तकनीक-आधारित प्रक्रिया को अपनाते हुए अब शीघ्र ही अमीनों के स्थानांतरण की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी। यह कदम बिहार सरकार के उस संकल्प को दर्शाता है जिसके तहत डिजिटल इंडिया के साथ कदमताल करते हुए शासन में सुशासन और ईमानदारी को प्राथमिकता दी जा रही है।
