पटना। बिहार सरकार के गन्ना उद्योग विभाग द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिहार गन्ना उद्योग निवेश प्रोत्साहन नीति-2026 की आधिकारिक घोषणा की गई है। इस नीति को गत चौबीस जून को ही मंत्रिपरिषद की संस्वीकृति मिल चुकी है, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य में कृषि आधारित उद्योगों और निवेश को बढ़ावा देना है।
नई प्रोत्साहन नीति और वित्तीय प्रावधान
नई नीति के अंतर्गत निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई आकर्षक अनुदानों का प्रावधान किया गया है:
- चीनी मिल: राज्य में नई चीनी मिल स्थापित करने पर 70 करोड़ रुपये तक का भारी पूंजी अनुदान दिया जाएगा।
- डिस्टीलरी और इथेनॉल: डिस्टीलरी तथा इथेनॉल इकाइयों के लिए 5 करोड़ रुपये तक का अनुदान तय किया गया है।
- सह-विद्युत उत्पादन: सह-विद्युत (को-जेनरेशन) उत्पादन इकाई के लिए 15 करोड़ रुपये तक की सहायता मिलेगी।
- अन्य प्रावधान: कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट पर भी विशेष अनुदान के साथ-साथ औद्योगिक भूमि के आवंटन में भारी रियायतें दी जाएंगी।
सासामूसा चीनी मिल और मोतीपुर का पुनरुद्धार
गोपालगंज जिले की सासामूसा चीनी मिल, जो वर्ष 2021-22 से बंद पड़ी थी, के दिन बहुरने की उम्मीद जग गई है। सरकार ने यहां के गन्ना किसानों के बकाए ईख मूल्य के रूप में 43 करोड़ रुपये के भुगतान को मंजूरी दी है, हालांकि यह मामला अभी एनसीएलटी (NCLT) कोलकाता बेंच में विचाराधीन है। इसके अतिरिक्त, मुजफ्फरपुर की बंद पड़ी मोतीपुर चीनी मिल की 266 एकड़ जमीन मेसर्स इंडियन पोटाश लिमिटेड से वापस लेने का निर्णय लिया गया है। इस भूमि पर एक आधुनिक चीनी मिल के साथ-साथ एक नए गन्ना अनुसंधान केंद्र का निर्माण किया जाएगा।
किसानों का शत-प्रतिशत भुगतान और तकनीकी समझौते
सरकार ने पारदशितता बरतते हुए जानकारी दी है कि पेराई सत्र 2025-26 के दौरान राज्य की चीनी मिलों ने गन्ना किसानों के कुल ईख मूल्य यानी 2137.83 करोड़ रुपये का शत-प्रतिशत भुगतान सफलतापूर्वक कर दिया है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री गन्ना विकास योजना के अंतर्गत बीज विकास, यंत्रिकरण और नर्सरी योजनाओं के लिए करोड़ों रुपये स्वीकृत किए गए हैं। कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए गन्ना प्रजनन संस्थान (कोयंबटूर), वसंतदादा सुगर संस्थान (पुणे) और आईआईटी पटना के साथ ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) भी किए गए हैं।


