पटना। बिहार में शिक्षक बहाली की प्रक्रिया अब आंदोलनों की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। TRE-4 की वैकेंसी और स्पष्ट नोटिफिकेशन की मांग कर रहे अभ्यर्थियों पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज के बाद पूरे राज्य में उबाल है। इस बर्बर कार्रवाई के विरोध में आज शाम 4:30 बजे पटना के ऐतिहासिक GPO गोलंबर पर विभिन्न छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों ने बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया है। इस दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का पुतला दहन कर आक्रोश व्यक्त किया जाएगा।

​दमनकारी नीतियों के खिलाफ एकजुट हुए संगठन

​छात्रों पर हुए हमले के खिलाफ भाकपा-माले, आइसा (AISA) और आरवाईए (RYA) ने संयुक्त मोर्चा खोल दिया है। संगठनों का आरोप है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपने हक की मांग कर रहे युवाओं को अपराधियों की तरह सड़कों पर दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया। इस हिंसक कार्रवाई में कई अभ्यर्थियों के सिर फट गए और दर्जनों गंभीर रूप से घायल हुए हैं। महिला अभ्यर्थियों के साथ की गई बदसलूकी ने सरकार की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संगठनों ने इसे राज्य प्रायोजित दमन करार देते हुए दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई और घायलों के लिए मुआवजे की मांग की है।

​पदों की संख्या में कटौती से बढ़ा असंतोष

​छात्रों के आक्रोश का मुख्य कारण रिक्तियों की संख्या में लगातार हो रही कटौती और देरी है। अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार ने पहले 1.20 लाख पदों पर भर्ती का आश्वासन दिया था, जिसे बाद में घटाकर 46 हजार और अब मात्र 26-27 हजार पदों तक सीमित करने की चर्चा है। स्पष्ट नोटिफिकेशन के अभाव में हजारों युवाओं का भविष्य अधर में लटका है। कई छात्रों ने अपनी जमीन गिरवी रखकर या निजी नौकरियां छोड़कर शिक्षक बनने का सपना संजोया था, जो अब टूटता नजर आ रहा है।

​रोजगार के सवाल पर चौतरफा घिरी सरकार

​विपक्षी दलों और छात्र नेताओं का कहना है कि बिहार के सरकारी स्कूलों में लाखों पद खाली हैं, लेकिन सरकार नई बहाली निकालने के बजाय लाठी के दम पर युवाओं की आवाज दबाना चाहती है। भाजपा-जदयू गठबंधन पर निशाना साधते हुए प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब भी नौजवान शिक्षा और रोजगार के सवाल पर सड़कों पर उतरते हैं, उन्हें पुलिसिया बर्बरता का सामना करना पड़ता है। आज का पुतला दहन कार्यक्रम इसी तानाशाही मानसिकता के खिलाफ एक बड़ा शंखनाद माना जा रहा है।