कुंदन कुमार, पटना। बिहार के शिक्षा क्षेत्र में बड़े बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाते हुए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने नई शिक्षक ट्रांसफर नियमावली 2026 के प्रावधानों और अब तक की पूरी प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य में शिक्षकों का यह स्थानांतरण पूरी तरह से ऐच्छिक और पारदर्शी होगा, जिसमें किसी भी शिक्षक के साथ जबरदस्ती नहीं की जाएगी।
समानुपातीकरण और स्वीकृत पदों का गणित
राज्य के कुल 77 हजार सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए यह प्रक्रिया पूरी तरह से समानुपातीकरण के आधार पर शुरू की गई है। शिक्षा मंत्री ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि वर्तमान स्थिति के अनुसार:
- कक्षा 1 से 5: स्वीकृत पदों की तुलना में 6,50,413 शिक्षक अधिक यानी सरप्लस हैं।
- कक्षा 6 से 8: इस वर्ग में 9,471 शिक्षक अधिक पाए गए हैं।
- इन आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए ही शिक्षकों के समायोजन की पूरी रूपरेखा तैयार की गई है।
आवेदन प्रक्रिया और विकल्प के नियम
मंत्री ने जोर देकर कहा कि केवल वही शिक्षक स्थानांतरित किए जाएंगे जो इसके लिए स्वेच्छा से ऑनलाइन आवेदन करेंगे। जो आवेदन नहीं करेंगे, उनका तबादला नहीं किया जाएगा। वर्तमान में समायोजन और समानुपातीकरण के लिए आवेदन लिए जा रहे हैं, जिसके तहत उत्साहजनक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है:
- अब तक 22,591 सरप्लस शिक्षकों ने ट्रांसफर के लिए आवेदन किया है।
- आपसी सहमति यानी म्युचुअल ट्रांसफर के लिए 2,142 शिक्षकों ने आवेदन किया है।
पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हर शिक्षक को ट्रांसफर पोर्टल पर 30 स्कूलों का विकल्प चुनने की सुविधा दी जा रही है। इसके अलावा, दूरी और सहूलियत का खास ख्याल रखा गया है:
- महिला शिक्षकों को उनके अपने पंचायत के बगल वाले पंचायत में विकल्प मिलेगा।
- पुरुष शिक्षकों को अपने ब्लॉक के बगल वाले 4 ब्लॉकों का विकल्प प्रदान किया जाएगा।
लाइव मॉनिटरिंग और शिकायत निवारण प्रणाली
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शिक्षा मंत्री ने ट्रांसफर पोर्टल की ऑनलाइन गतिविधियों को लाइव स्क्रीन पर प्रदर्शित कर इसकी कार्यप्रणाली समझाई। प्रक्रिया में किसी भी तरह की पारदर्शिता की कमी न रहे, इसके लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है:
- किसी भी तरह की समस्या या सहायता के लिए 14,417 शिकायतों हेतु टॉल-फ्री नंबर जारी किया गया है।
- इस पूरी प्रक्रिया की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शिक्षा मंत्री खुद अगले 3 महीनों तक हर दो दिनों पर इस ट्रांसफर प्रक्रिया की समीक्षा करेंगे।


