कुंदन कुमार, पटना। बिहार में शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया (TRE 4) को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और छात्र संगठनों का पारा चढ़ गया है। हाल ही में बिहार सरकार ने चौथे चरण की शिक्षक बहाली के तहत 32,388 पदों पर बहाली की घोषणा की है। सरकार के इस ऐलान के बाद से ही छात्रों और छात्र नेताओं में भारी असंतोष देखा जा रहा है। छात्रों का कहना है कि सरकार ने पहले जो वादा किया था, वह उससे पीछे हट रही है और निकाली गई सीटों की संख्या बेहद कम है।
​छात्र नेता शाहबाज और अस्मिता कुमारी ने सरकार के इस कदम की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि सरकार ने अपना वादा पूरा नहीं किया है। पिछले तीन साल से राज्य में सही समय पर और पर्याप्त मात्रा में वेकेंसी नहीं आई है, जिसके कारण बेरोजगार युवाओं में भारी निराशा है। बिहार में लगभग 15 लाख छात्र ऐसे हैं जो शिक्षक पात्रता परीक्षा और बहाली का इंतजार कर रहे हैं, जबकि इसके मुकाबले मात्र 32,000 सीटें दी जाना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। छात्रों का सवाल है कि शिक्षा मंत्री ने जो आश्वासन दिए थे, धरातल पर उसका उल्टा क्यों हो रहा है?

​छात्र नेताओं की प्रमुख मांगें:

​पदों की संख्या में वृद्धि: सरकार द्वारा घोषित 32,388 सीटों को बढ़ाकर कम से कम 46,000 किया जाए, जैसा कि पहले वादा किया गया था।

  • ​एकल परीक्षा प्रणाली: छात्रों का साफ कहना है कि प्रारंभिक (PT) और मुख्य परीक्षा जैसी जटिल प्रक्रिया इस स्तर पर बिल्कुल उचित नहीं है। सरकार को पारदर्शिता और सुगमता के साथ केवल एक एकल परीक्षा का आयोजन करना चाहिए।
  • ​डोमिसाइल नीति: बिहार के स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने के लिए डोमिसाइल नीति का सख्ती से पालन किया जाए।

​एक सप्ताह का अल्टीमेटम और आंदोलन की चेतावनी:

​छात्र नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अगर सरकार ने आगामी एक सप्ताह के भीतर इन सभी जायज मांगों पर सकारात्मक विचार करते हुए संशोधन नहीं किया, तो प्रसिद्ध छात्र नेता दिलीप कुमार के नेतृत्व में पूरे बिहार में उग्र आंदोलन किया जाएगा। इस आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।