पटना। बिहार सरकार राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए पर्यटन और कृषि-आधारित उद्योगों पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रही है। हाल ही में पटना में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने कई महत्वाकांक्षी योजनाओं का शुभारंभ किया, जो राज्य के विकास में मील का पत्थर साबित होंगी।

​पटना में 15 जुलाई से शुरू होगी हेलीकॉप्टर सेवा

​पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, बिहार सरकार 15 जुलाई से राज्य में हेलीकॉप्टर सेवा का संचालन शुरू कर रही है। इसके तहत मात्र 2100 रुपये में पटना शहर का हवाई भ्रमण किया जा सकेगा, जिससे पर्यटकों को शहर के प्रमुख स्थलों का विहंगम दृश्य देखने को मिलेगा।
​इसके अतिरिक्त, राज्य के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों जैसे राजगीर, मुंडेश्वरी माता मंदिर, तुतला भवानी मंदिर और वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व के लिए भी हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। इस यात्रा के लिए प्रति व्यक्ति शुल्क 6000 रुपये निर्धारित किया गया है, जिस पर राज्य सरकार द्वारा अतिरिक्त सब्सिडी भी प्रदान की जाएगी।

​मत्स्य पालन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और आधुनिक तकनीक

​मीठापुर, पटना में राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड (एनएफडीबी) के क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन बिहार के मत्स्य पालकों के लिए एक बड़ी सौगात है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बिहार वर्तमान में अपनी आवश्यकता का 95 प्रतिशत मछली उत्पादन स्वयं कर रहा है। अब लक्ष्य केवल उत्पादन तक सीमित न रहकर, बिहार की मछली को विदेशों तक पहुंचाने का है।
​सरकार की योजना हर पंचायत और प्रखंड में मछली उत्पादन को आधुनिक बनाने की है। मत्स्य पालकों को नई तकनीक का प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही, हाट आधारित बाजार मॉडल विकसित किए जाएंगे, जहां दूध, सब्जी और मछली एक ही स्थान पर बेची जा सकेंगी। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा। साथ ही, तालाबों के ऊपर सोलर पैनल लगाकर सौर ऊर्जा उत्पादन और नीचे मछली पालन का अभिनव प्रयोग भी किया जाएगा।

​प्रशासनिक सुधार: समयबद्ध समाधान और उद्योग नीति

​सुशासन की दिशा में मुख्यमंत्री ने दो बड़े निर्णय लिए हैं। पहला, ‘सहयोग’ कार्यक्रम के माध्यम से आम नागरिकों की समस्याओं का 30 दिनों के भीतर निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। यदि ऐसा नहीं होता है, तो संबंधित अधिकारी पर कड़ी कार्रवाई होगी।
​दूसरा, औद्योगिक विकास को गति देने के लिए ‘स्वतः लाइसेंस’ नीति लागू की गई है। इसके अनुसार, यदि किसी उद्योग के लिए आवेदन करने के 30 दिनों के भीतर लाइसेंस जारी नहीं किया जाता है, तो 31वें दिन उसे स्वतः मंजूर मान लिया जाएगा। बिहार अब रक्षा, आईटी, सेमीकंडक्टर और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में निवेश के लिए एक प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। केंद्र और राज्य के इस तालमेल से बिहार की विकास यात्रा को एक नई गति मिली है।