पटना। बिहार में उच्च शिक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार और यूनिवर्सिटी के शिक्षकों के बीच टकराव गहराता जा रहा है। सरकार द्वारा प्रस्तावित नए विश्वविद्यालय अधिनियम के विरोध में राज्यभर के सरकारी कॉलेजों के 12 हजार से अधिक शिक्षक और कर्मचारी आज सामूहिक अवकाश पर हैं। बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक-शिक्षकेतर कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा’ के आह्वान पर यह विरोध दर्ज किया जा रहा है, जिसके तहत तमाम यूनिवर्सिटी मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर कुलपति को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
50 साल पुराना कानून बदलने की तैयारी और मुख्य आपत्तियां
बिहार में करीब 50 साल बाद यूनिवर्सिटी कानून में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सरकार ‘बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-1976’ और ‘पटना विश्वविद्यालय अधिनियम-1976’ को पूरी तरह समाप्त कर इसकी जगह नया ‘बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-2026’ लागू करने की तैयारी में है।
शिक्षकों और कर्मचारियों का मुख्य विरोध इस बात पर है कि इस नए विधेयक से विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। विरोध के इस क्रम में शिक्षकों ने पहले 5 अगस्त से 8 अगस्त तक काला बिल्ला लगाकर चरणबद्ध आंदोलन किया था। पटना यूनिवर्सिटी के शिक्षकों ने चार दिनों तक सामूहिक अवकाश रखकर विरोध जताया और लोकभवन के लिए आक्रोश मार्च भी निकाला, जिसे पुलिस ने पटना कॉलेज के पास रोक दिया था।
सरकार के पास होगा ट्रांसफर, पोस्टिंग और नियंत्रण
प्रस्तावित नए विधेयक के लागू होने से प्रोफेसरों की भर्ती, ट्रांसफर-पोस्टिंग और अन्य प्रशासनिक नियंत्रण सीधे तौर पर सरकार के हाथ में चले जाएंगे। शिक्षकों का कहना है कि इससे उन्हें छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी सचिवालय के चक्कर काटने पड़ेंगे। इसके साथ ही, राज्यपाल के अधिकार भी कम होंगे और कॉलेज शिक्षकों के चुनाव लड़ने तथा किसी राजनीतिक दल की सदस्यता लेने पर पूरी प्रतिबंध लग सकता है। इसके अलावा, कॉलेजों के यूनिवर्सिटी से अलग होने पर शिक्षकों के यूनिवर्सिटी प्रोफेसर बनने की संभावनाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
नए कानून की आवश्यकता क्यों पड़ी?
दूसरी ओर, सरकार का तर्क है कि विश्वविद्यालयों में लगातार वित्तीय अनियमितताएं सामने आ रही थीं। इसके साथ ही परीक्षाएं और कक्षाएं समय पर आयोजित नहीं होना, नियुक्तियों, प्रोन्नति और वेतन वृद्धि में धांधली की शिकायतें मिलना तथा राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद (NAAC) ग्रेडिंग में बिहार के कॉलेजों का निराशाजनक प्रदर्शन इस नए कानून की मुख्य वजह रहे हैं।
राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का कहना है कि उच्च शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने, छात्रों का दूसरे राज्यों में हो रहे पलायन को रोकने और विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए यह उच्च शिक्षा विधेयक लाया जा रहा है।
नए कानून से क्या बदलाव होंगे?
इस नए अधिनियम के लागू होने से सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि कॉलेज अब विश्वविद्यालयों के स्थान पर सीधे सरकार के नियंत्रण में आ जाएंगे। प्रशासनिक कार्यों के संचालन के लिए सरकारी अधिकारियों की तैनाती होगी और पूरे राज्य में शिक्षा तथा पाठ्यक्रम का एक समान पैटर्न लागू किया जाएगा। विश्वविद्यालयों के पास मुख्य रूप से स्नातकोत्तर (पीजी) की पढ़ाई और शोध (रिसर्च) का कार्य ही शेष रह जाएगा। पटना यूनिवर्सिटी के व्हीलर सीनेट हॉल में दोपहर 1:30 बजे होने वाले प्रदर्शन के बाद शिक्षक कुलपति को ज्ञापन सौंपकर इस अधिनियम को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग करेंगे।


