पटना। बिहार के बिहटा प्रखंड में बुधवार को रसोई गैस की किल्लत और अव्यवस्था का एक भयावह मंजर देखने को मिला। स्थानीय गैस गोदाम के बाहर सुबह से ही उपभोक्ताओं का सैलाब उमड़ पड़ा। स्थिति यह थी कि सिलेंडर पाने की जद्दोजहद में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को करीब 200 मीटर लंबी कतार में खड़ा होना पड़ा। चिलचिलाती धूप और लू के थपेड़ों के बीच घंटों इंतजार ने लोगों के धैर्य की परीक्षा ली।

​भीषण गर्मी में घंटों का इंतजार

​पटना जिले में पड़ रही रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के बीच गैस गोदाम के बाहर की यह तस्वीर सरकारी दावों और वितरण व्यवस्था की पोल खोलती नजर आई। कतार इतनी लंबी थी कि वह मुख्य सड़क तक जा पहुंची। लाइन में खड़े युवाओं और पुरुषों के साथ-साथ बड़ी संख्या में महिलाएं और बुजुर्ग भी अपने खाली सिलेंडर को घसीटते हुए अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। तपती धूप से बचने के लिए लोग सिर पर गमछा और दुपट्टा रखे हुए थे, लेकिन घंटों खड़े रहने के कारण कई लोगों की तबीयत बिगड़ती महसूस हुई।

​वितरण की धीमी रफ्तार से बढ़ी परेशानी

​लाइन में लगे उपभोक्ताओं का आरोप है कि गोदाम प्रबंधन द्वारा गैस वितरण की प्रक्रिया बेहद सुस्त है। बनवारीपुर गांव से आई एक बुजुर्ग महिला ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा, सुबह से ही भूखे-प्यासे लाइन में लगे हैं। उम्र के इस पड़ाव में इतनी गर्मी बर्दाश्त नहीं होती, लेकिन चूल्हा जलाने के लिए गैस तो चाहिए ही। स्थानीय लोगों का कहना है कि वितरण काउंटरों की संख्या कम होने के कारण भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है।

​गैस की कमी नहीं, बस भीड़ ज्यादा

​दूसरी ओर, गैस गोदाम के कर्मचारियों ने स्टॉक की कमी की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि गोदाम में पर्याप्त मात्रा में एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध हैं। कर्मचारियों के मुताबिक, एक साथ बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं के पहुंच जाने और सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए पर्ची काटने व सिलेंडर देने में समय लग रहा है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि कतार में खड़े सभी वैध उपभोक्ताओं को गैस मुहैया कराई जाएगी।

​प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग

​इस अव्यवस्था को देखते हुए स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और संबंधित गैस कंपनियों से हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि गर्मी के मौसम को देखते हुए गोदामों पर पीने के पानी और छाया की व्यवस्था होनी चाहिए। साथ ही, होम डिलीवरी व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है ताकि लोगों को सड़कों पर घंटों न खड़ा होना पड़े।