Bilaspur News Update : बिलासपुर. रेलवे प्रशासन द्वारा यात्रियों की बेहतर यात्रा सुविधा व अधिकाधिक यात्रियों को कंफर्म बर्थ उपलब्ध कराने हेतु दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से चलने वाली गाड़ी संख्या 18237/18238 कोरबा-अमृतसर-बिलासपुर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस में एक अतिरिक्त एसी-3 कोच की सुविधा अस्थायी रूप से उपलब्ध कराई जा रही है. यह सुविधा गाड़ी संख्या 18237 कोरबा-अमृतसर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस में 11 मई से 19 मई तक तथा गाड़ी संख्या 18238 अमृतसर-बिलासपुर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस में 13 मई से 21 मई तक उपलब्ध रहेगी.

बिलासपुर को मिलेगा अब आधुनिक ट्रांसपोर्ट नगर

बिलासपुर. न्यायधानी में पिछले दो दशक से लंबित ट्रांसपोर्ट नगर की मांग अब पूरी होती दिखाई दे रही है. औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को नई दिशा देने के उद्देश्य से बिलासपुर में आधुनिक ट्रांसपोर्ट नगर विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है. सोमवार को मंत्रालय में मुख्य सचिव विकास शील की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर गंभीरता से चर्चा की गई.

बैठक में उद्योग व वाणिज्य विभाग के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम की सार्वजनिक निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति ने विभिन्न औद्योगिक परियोजनाओं की समीक्षा की, जिसमें बिलासपुर ट्रांसपोर्ट नगर परियोजना प्रमुख रूप से केंद्र में रही. जिला उद्योग संघ के अध्यक्ष सतीश शाह ने बताया कि ट्रांसपोर्ट नगर बनने से शहर की यातायात व्यवस्था में भी बड़ा सुधार आएगा. वर्तमान में व्यापार विहार, कर्बला और शहर के अन्य हिस्सों में भारी वाहन सड़कों पर खड़े रहते हैं, जिससे अक्सर जाम की स्थिति बनती है और आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है. ट्रांसपोर्ट नगर बनने के बाद सभी ट्रांसपोर्ट कंपनियों के कार्यालय और भारी वाहन एक ही स्थान पर संचालित होंगे. इससे शहर के भीतर भारी वाहनों का दबाव कम होगा और सड़कें अधिक व्यवस्थित दिखाई देंगी.

उद्योगपतियों की वर्षों पुरानी मांग को मिली गति

जिला उद्योग संघ के सचिव शरद सक्सेना ने बताया कि ट्रांसपोर्ट नगर की मांग लगभग 20 से 25 वर्षों से लंबित थी. लंबे समय से उद्योगपतियों और व्यापारियों की यह मांग रही है कि बिलासपुर में व्यवस्थित और आधुनिक ट्रांसपोर्ट हब बनाया जाए, ताकि माल परिवहन की सुविधा सीधे शहर से उपलब्ध हो सके. उन्होंने कहा कि वर्तमान में लंबी दूरी की अधिकांश गाड़ियां रायपुर से संचालित होती हैं. इसके कारण बिलासपुर के व्यापारियों और उद्योगपतियों को अतिरिक्त समय और खर्च का सामना करना पड़ता है. जो कार्य सामान्य रूप से तीन दिनों में पूरा होना चाहिए, उसमें छह से नौ दिन तक लग जाते हैं. इससे व्यापार की लागत बढ़ जाती है और माल ढुलाई का किराया भी अधिक देना पड़ता है. यदि ट्रांसपोर्ट नगर विकसित होता है और विशेष रूप से सिलपहरी क्षेत्र के आसपास इसका विस्तार किया जाता है, तो बिलासपुर सीधे बड़े ट्रांसपोर्ट नेटवर्क से जुड़ सकेगा. इससे माल ढुलाई का खर्च कम होगा, व्यापार में तेजी आएगी और स्थानीय उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा.

देश के बड़े राज्यों के लिए सीधे मिलेगी परिवहन सुविधा

सतीश शाह ने बताया कि अभी बिलासपुर से नॉर्थ-ईस्ट, गुजरात और दक्षिण भारत के लिए सीधे ट्रांसपोर्ट वाहन उपलब्ध नहीं हो पाते, जिसके कारण व्यापारियों को रायपुर पर निर्भर रहना पड़ता है. लेकिन ट्रांसपोर्ट नगर बनने के बाद विभिन्न राज्यों के लिए सीधे गाड़ियां उपलब्ध होने लगेंगी. इससे व्यापारिक गतिविधियों को बड़ा विस्तार मिलेगा और बिलासपुर क्षेत्रीय व्यापारिक केंद्र के रूप में मजबूत होगा.

रोजगार और बुनियादी सुविधाओं को मिलेगा बढ़ावा

प्रस्तावित ट्रांसपोर्ट नगर केवल माल परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स, गोदाम, वाहन मरम्मत, लोडिंग-अनलोडिंग और अन्य सहायक व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलेगा. इसके साथ ही क्षेत्र में सड़क, बिजली, नाली, साफ-सफाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास होगा. इससे आसपास के क्षेत्रों का समग्र विकास होने की उम्मीद है.

तरबूज के बाद चिकन खाने से चार बच्चों की हालत खराब, 1 की मौत 

जांजगीर-चांपा. छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के धुरकोट गांव में फूड पॉइजनिंग का मामला सामने आया है. एक ही परिवार के चार बच्चे अचानक बीमार पड़ गए, जिनमें से एक 15 वर्षीय किशोर की इलाज के लिए अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई. इस घटना के बाद गांव में हड़कंप मच गया है. जानकारी के अनुसार, दल्हा पोड़ी गांव के रहने वाले बच्चे अपने मामा के घर धुरकोट आए हुए थे. बच्चों ने शनिवार शाम तरबूज खाया था और रात में चिकन का सेवन किया था. इसके बाद देर रात सभी बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी. उन्हें उल्टी-दस्त की शिकायत होने लगी. तत्काल परिजन बच्चों को लेकर अस्पताल के लिए रवाना हुए, लेकिन 15 वर्षीय अखिलेश धीवर ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया. वहीं पिंटू धीवर (12 वर्ष), हितेश धीवर (13 वर्ष) और श्री धीवर (4 वर्ष) को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है.

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CEO के खिलाफ अध्यक्ष सहित सदस्यों ने खोला मोर्चा

कोरबा. सोमवार को जिला पंचायत परिसर में अध्यक्ष सहित सदस्यों ने जिला सीईओ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. सीईओ पर मनमानी, जनप्रतिनिधियों की अनदेखी, डीएमएफ के उपयोग व कथित कमीशनखोरी के गंभीर आरोप लगाते हुए जनप्रतिनिधियों ने जिला पंचायत मेन गेट के बाहर जमीन पर बैठकर प्रदर्शन किया. जनप्रतिनिधियों ने सीईओ को बैठक के लिए बुलाया था. उनका कहना है कि तीन घंटे इंतजार के बाद भी सीईओ नहीं आए. जिसके बाद जनप्रतिनिधियों का आक्रोश भड़क उठा.

भाजपा समर्थित जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह सहित जिला पंचायत सदस्य कार्यालय परिसर में धरने पर बैठ गए. जिला पंचायत सीईओ पर मनमानी, जनप्रतिनिधियों की अनदेखी और कथित कमीशनखोरी जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया. जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह ने बताया कि सीईओ को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही है. इसी मुद्दे को लेकर उनके चेंबर में सभी सदस्यों की बैठक आयोजित की गई थी. जिसमें निर्माण कार्यों और विकास योजनाओं को लेकर चर्चा होनी थी. बैठक में सीईओ दिनेश कुमार नाग को भी बुलाया गया था, लेकिन करीब 3 घंटे इंतजार कराने के बाद भी उनके नहीं पहुंचने पर अध्यक्ष और सदस्य नाराज हो गए. इसके बाद सीईओ के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई. डॉ. सिंह ने कहा कि यदि जनप्रतिनिधियों के कार्यों को महत्व नहीं दिया जाएगा और समस्याओं का समाधान नहीं होगा तो सभी सदस्य इस्तीफा देकर घर बैठने को मजबूर होंगे. सदस्यों ने आरोप लगाया कि जिला पंचायत में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की राय और क्षेत्रीय आवश्यकताओं को दरकिनार कर प्रशासनिक स्तर पर एकतरफा फैसले लिए जा रहे हैं. जिससे जनप्रतिनिधियों में भारी नाराजगी है. डीएमएफ की राशि जनता के विकास कार्यों के लिए होती है, लेकिन योजनाओं के चयन और स्वीकृति प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है. कई सदस्यों ने आरोप लगाया कि मनमानी के कारण पंचायत जनप्रतिनिधियों की भूमिका केवल औपचारिक बनकर रह गई है. यह भी आरोप लगाया कि विकास कार्यों में जिला पंचायत में कथित कमीशनखोरी का खेल चल रहा है. उन्होंने कहा कि जब जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों की बात नहीं सुनी जाएगी तो लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्व समाप्त हो जाएगा. इस दौरान जिला पंचायत परिसर में काफी देर तक गहमा गहमी का माहौल बना रहा. इस पूरे घटनाक्रम में जिला पंचायत की कार्यप्रणाली और डीएमएफ के उपयोग को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

यह बेहद गंभीर मामला : उद्योग मंत्री

उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि सदस्यों ने बताया कि सीईओ के साथ जनप्रतिनिधियों की जम नहीं रही है. जनप्रतिनिधियों का कहना नहीं मान रहे हैं, कमीशन खोरी की बात भी कही गई है. इस संबंध में सीईओ व कलेक्टर से बात की जाएगी. फिर भी बात नहीं बनी तो शासन स्तर पर चर्चा करेंगे. यह बेहद गंभीर मामला है.

अध्यक्ष ने दी तालाबंदी की चेतावनी

अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह ने कहा कि सीईओ क्या करते हैं, इसकी हमारे पास रिकॉर्डिंग है. ऐसे अधिकारी सरकार को बदनाम करते हैं. वे बडे एटिट्यूड में रहते हैं. 20 से 25 साल मुझे हो गए. मेरे कार्यकाल में 16 सीईओ यहां रह चुके हैं, किन्तु इनके जैसे सीईओ नहीं देखा, जो जनप्रतिनिधियों को तवज्जो नहीं देते. उन्होंने कहा कि सामान्य सभा को दरकिनार किया जा रहा है. मनमानी की जा रही है. यदि यही हालात रहे तो हम एक महीने का समय सदन को दे रहे हैं, यदि इसके बाद भी नहीं सुधरे तो जिला पंचायत में ताला लगा दिया जाएगा. इस संबंध में जिला पंचायत सीईओ से उनके मोबाइल पर चर्चा का प्रयास किया गया, लेकिन नंबर स्वीच ऑफ था.