भुवनेश्वर। संशोधित खान और खनिज (विकास और विनियमन) यानी MMDR अधिनियम को वापस लेने की मांग को लेकर राजधानी भुवनेश्वर में बीजू जनता दल के कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। लोकभवन के समक्ष आयोजित इस आंदोलन के दौरान पुलिस और BJD कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति पैदा हो गई। इस वजह से पावर हाउस चौक पर काफी देर तक तनाव बना रहा।

पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को की रोकने की कोशिश
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, BJD के नेताओं का एक शिष्टमंडल राज्यपाल से मिलकर राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपने जा रहा था। जब कार्यकर्ता लोकभवन की ओर बढ़ रहे थे, तो पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों द्वारा बैरिकेड्स तोड़ने के प्रयास के बाद पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच हाथापाई जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई।

इस विशाल प्रदर्शन में BJD के सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ-साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक भी शामिल हुए। पार्टी ने केंद्र सरकार द्वारा संशोधित MMDR अधिनियम को “काला कानून” करार देते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।
BJD नेताओं ने कहा कि यह नया कानून राज्य के खनिज संसाधनों के अधिकारों और ओडिशा के व्यापक हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। जब तक इस कानून को वापस नहीं लिया जाता, तब तक BJD सड़क से लेकर संसद तक अपना आंदोलन जारी रखेगी।
पावर हाउस चौक पर काफी हंगामे के बाद आखिरकार पुलिस ने स्थिति पर काबू पाया। इसके पश्चात, BJD के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल को राजभवन जाकर राज्यपाल से मिलने की अनुमति दी गई। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर राष्ट्रपति के नाम अपना ज्ञापन सौंपा और MMDR अधिनियम पर पुनर्विचार करते हुए इसे रद्द करने का अनुरोध किया।

संशोधित MMDR एक्ट को तुरंत लिया जाए वापस- BJD
बीजू जनता दल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, “यह ज़मीन हमारी है – यह खदान हमारी है, संशोधित MMDR एक्ट को तुरंत वापस लिया जाए। ओडिशा के लोगों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।” BJD ने कहा कि पार्टी ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है और राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपने के लिए राज्यपाल से मुलाकात की है।
विधानसभा सत्र से पहले बढ़ सकता है राजनीतिक पारा
ओडिशा विधानसभा का आगामी सत्र जल्द ही शुरू होने वाला है। ऐसे में BJD द्वारा इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने के पीछे सरकार को घेरने की रणनीति साफ दिखाई दे रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में सदन के अंदर और बाहर, इस खनिज नीति और MMDR कानून को लेकर राज्य का राजनीतिक पारा और ज्यादा चढ़ने वाला है।
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