हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर के भाजपा पार्षद जीतू यादव (जाटव) का वनवास आखिरकार खत्म हो गया है। पार्टी ने उनका निष्कासन समाप्त कर दिया है। विधायक रमेश मेंदोला-बीजेपी नगराध्यक्ष सुमित मिश्रा ने उनकी पार्टी में वापसी करवाई है।
क्या था पूरा मामला?
4 जनवरी 2025 को भाजपा पार्षद कमलेश कालरा के घर पर विवाद और हंगामे की घटना सामने आई थी। इस मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर काफी तूल पकड़ा था। घटना के बाद जीतू यादव को संदेही मानते हुए पुलिस ने जांच शुरू की थी। वहीं भाजपा संगठन ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों पक्षों से जवाब मांगा था।
जांच में क्या सामने आया?
पुलिस की ओर से कोर्ट में पेश किए गए पूरक चालान के अनुसार जांच के दौरान ऐसे कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले, जिनसे यह साबित हो सके कि जीतू यादव घटनास्थल पर मौजूद थे या उन्होंने सीधे तौर पर किसी प्रकार की धमकी या अभद्रता की थी। जांच में पार्षद कमलेश कालरा की पत्नी अर्चना कालरा, बेटे दीपेश और अन्य परिजनों के बयान भी दर्ज किए गए। पुलिस के अनुसार इन बयानों में भी जीतू यादव की घटनास्थल पर मौजूदगी का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला।
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने CDR और मोबाइल लोकेशन निकाली जिसमें यह साबित हुआ कि जीतू यादव मौके पर मौजूद नहीं थे। जीतू यादव के द्वारा बताई गई लोकेशन के सीसीटीवी फुटेज पुलिस को मिले थे। जिसे कोर्ट में पेश किया गया है। जिससे साबित होता है कि जीतू यादव घटना के वक्त मौके पर मौजूद नहीं थे। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की। घटना वाले दिन जीतू यादव की लोकेशन अवंतिका गैस एजेंसी के पास स्थित सामुदायिक भवन क्षेत्र में पाई गई, जो घटनास्थल से अलग बताई गई। तकनीकी साक्ष्यों और अन्य गवाहों के बयानों ने भी इस तथ्य की पुष्टि की।
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