कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। राजनीति में जीत का स्वाद बड़ा मीठा होता है, लेकिन जब जीत बंगाल जैसी कठिन पिच पर हो,तो उसका स्वाद थोड़ा ‘चटपटा’ हो जाता है। कुछ ऐसा ही नज़ारा आज ग्वालियर में देखने को मिला।
ग्वालियर में दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन सत्र में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव शामिल हुए थे, लेकिन जैसे ही सूरज ढला वैसे ही बंगाल में कमल खिल उठा। जैसे ही पश्चिम बंगाल से बीजेपी की रिकॉर्ड जीत की खबर आई, ग्वालियर के इस कार्यक्रम का रंग ही बदल गया। कार्यकर्ताओं की खुशी का ठिकाना नहीं रहा, आमतौर पर जीत के मौके पर मिठाई या लड्डू खिलाए जाते हैं,लेकिन ग्वालियर के भाजपाइयों ने इस बार ‘सियासी मेन्यू’ में थोड़ा बदलाव किया।
बंगाल की मशहूर ‘झालमुड़ी’ तैयार कराई गई। ये संदेश साफ था- बंगाल के स्वाद के साथ, बंगाल फतह का जश्न,कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को झालमुड़ी खिलाकर जीत की बधाई दी और जमकर नारेबाजी की। ग्वालियर में गूंजते ‘जय श्री राम’ के नारों और झालमुड़ी के चटपटे स्वाद ने ये साफ कर दिया कि बंगाल की ये जीत एमपी के कार्यकर्ताओं में कितना जोश भर चुकी है। तो साहब, इसे कहते हैं ‘बंगाल का स्वाद, ग्वालियर का अंदाज़’।

