संजय पाटीदार, भोपाल। बच्चों में कैंसर की शुरुआत कई बार सामान्य बीमारी जैसी दिखाई देती है। लंबे समय तक बुखार, अचानक वजन कम होना या हड्डियों में दर्द को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। एम्स भोपाल के विशेषज्ञों ने सामुदायिक चिकित्सा अधिकारियों को शुरुआती संकेत पहचानने और समय पर विशेषज्ञ अस्पताल भेजने का प्रशिक्षण दिया।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम से जुड़े सामुदायिक चिकित्सा अधिकारियों के प्रशिक्षण में एम्स भोपाल के बाल रोग विभाग के प्रोफेसर एवं बाल रक्त रोग-कैंसर विशेषज्ञ नरेंद्र कुमार चौधरी और डीएम बाल रक्त रोग एवं कैंसर रेजिडेंट डॉ. मेघा धवन ने जागरूकता एवं शैक्षणिक सत्र लिए।
प्रशिक्षण कैंकिड्स किड्सकैन ने आयोजित किया।विशेषज्ञों ने बताया कि दो सप्ताह से ज्यादा बिना कारण बुखार, वजन कम होना, असामान्य रक्तस्राव, लगातार हड्डियों में दर्द, शरीर में गांठ या सूजन और पेट में असामान्य सूजन जैसे लक्षणों पर जांच जरूरी है।
सुबह सिरदर्द के साथ उल्टी होना मस्तिष्क में गांठ का संकेत हो सकता है। वहीं बच्चे की आंख में सफेद चमक या सफेद प्रतिबिंब रेटिनोब्लास्टोमा यानी आंख के कैंसर का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय जांच की सलाह दी गई।
विशेषज्ञों के मुताबिक बचपन के कैंसर की जल्दी पहचान और सही समय पर इलाज मिलने पर 70 से 90 प्रतिशत तक बच्चों के ठीक होने की संभावना रहती है। देरी होने पर इलाज के परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।
प्रशिक्षण में बताया गया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम से जुड़े चिकित्सा अधिकारी और स्वास्थ्यकर्मी बच्चों के लगातार संपर्क में रहते हैं। ऐसे में वे शुरुआती बदलाव पहचानकर संदिग्ध बच्चों को समय पर विशेषज्ञ केंद्र भेजने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
विशेषज्ञों का संदेश है कि हर बुखार या वजन कम होना कैंसर नहीं होता लेकिन लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच ही बीमारी की जल्द पहचान और बेहतर इलाज की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है।
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