कुंदन कुमार/पटना। 70वीं बीपीएससी (BPSC) परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद विवादों का दौर शुरू हो गया है। छात्र नेता दिलीप कुमार ने नतीजों में भारी अनियमितता का आरोप लगाते हुए आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने विशेष रूप से सामान्य वर्ग के परिणाम और भाषा आधारित भेदभाव को लेकर चिंता व्यक्त की है।
बाहरी राज्यों के छात्रों का दबदबा, बिहार के मेधावी पीछे?
दिलीप कुमार ने डेटा का हवाला देते हुए पूछा कि सामान्य श्रेणी में अन्य राज्यों के 300 से अधिक छात्रों ने सफलता कैसे प्राप्त की? उन्होंने इसे बिहार के शिक्षा तंत्र पर सवालिया निशान बताते हुए कहा क्या बिहार के विश्वविद्यालयों में अब पढ़ाई नहीं होती? या फिर हमारे छात्र अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों से कमजोर हैं? उन्होंने स्पष्ट मांग की है कि आयोग को इस अनपेक्षित परिणाम का तार्किक जवाब देना चाहिए।
हिंदी बनाम अंग्रेजी: उत्तर पुस्तिका में ‘दोहरी नीति’ का आरोप
आरोप का दूसरा बड़ा बिंदु ‘हिंदी माध्यम’ के छात्रों के साथ कथित भेदभाव है। दिलीप कुमार ने दावा किया कि मुख्य परीक्षा के निबंध पेपर में हिंदी माध्यम के छात्रों को जानबूझकर कम अंक दिए गए हैं, जबकि उसी स्तर के अंग्रेजी माध्यम के उत्तरों को अधिक अंक मिले हैं। उन्होंने कुछ उत्तर पुस्तिकाओं को आधार बनाते हुए इसे आयोग की ‘दोहरी नीति’ करार दिया है।
पारदर्शी जांच की मांग
छात्र नेता ने कहा कि यह स्थिति छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने बीपीएससी प्रबंधन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च-स्तरीय जांच कराई जाए और इसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए ताकि छात्रों का आयोग पर भरोसा कायम रह सके।

