Brazil Presidential Election: डोनाल्ड ट्रंप विरोधी लूला डा सिल्वा (Lula da Silva) ब्राजील के फिर से राष्ट्रपति बन गए हैं। वामपंथी राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा ने ब्राजील राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल कर ली है। 80 साल के लूला ने दक्षिणपंथी पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे फ्लावियो को मात देकर चौथी बार राष्ट्रपति बनने पर मुहर लगाई। लूला का अगला कार्यकाल 5 जनवरी 2027 से शुरू होगा। यह जीत लैटिन अमेरिका में वाम-मध्य विचारधारा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लूला दा सिल्वा पहले दौर की वोटिंग में फ्लावियो बोल्सोनारो से पिछड़ गए थे, लेकिन दूसरे दौर में बाजी पलट दी। 1989 में ब्राजील में सीधे राष्ट्रपति चुनाव शुरू हुए थे। उसके बाद यह पहली बार हुआ, जब पहले राउंड में दूसरे नंबर पर रहने वाला उम्मीदवार आखिरी राउंड में जीतकर राष्ट्रपति बना।
80 वर्षीय लूला को 51.75 प्रतिशत वोट मिले। जबकि पूर्व राष्ट्रपति और जेल में बंद जायर बोल्सोनारो के बेटे फ्लावियो को 48.25 प्रतिशत मत हासिल हुए। 100 प्रतिशत वोटों की गिनती पूरी होने के बाद, ब्राज़ील के चुनावी न्यायालय ने लूला की जीत की घोषणा की।
नतीजों में लूला की बढ़त सामने आने के बाद रियो डी जेनेरियो और साओ पाउलो में समर्थकों ने जश्न मनाया। कई जगहों पर लोग बार और अन्य स्थानों पर जुटकर मतगणना देख रहे थे। समर्थकों ने इसे गरीबों और वंचित समुदायों की जीत बताया। वहीं जीत के बाद हुंकार भरते हुए लूला डा सिल्वा ने कहा कि लोगों ने लोकतंत्र बचाने के लिए वोट दिया। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए विदेशी दखल को रोका। लूला ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि ब्राजील किसी भी देश का पिछलग्गू नहीं है। वह किसी दूसरे देश के इशारे पर नहीं चलेगा। सरकार के फैसलों में लोगों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी।

पहले दौर में पीछे थे लूला, ऐसे पलटी बाजी
4 अक्टूबर को पहले दौर की मतगणना में लूला, फ्लावियो से करीब 22 लाख वोट पीछे थे। इसके बाद उन्होंने अपने चुनाव अभियान में बदलाव किया और युवाओं समेत उन मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश की। लूला के अभियान में पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के कार्यकाल को प्रमुखता से उठाया गया। रैलियों में ‘नेवर अगेन बोल्सोनारो’ यानी ‘बोल्सोनारो दोबारा कभी नहीं’ का नारा दिया गया। युवाओं से जुड़ने के लिए लूला ने स्मार्टफोन खरीदा और समर्थकों के साथ सेल्फी व वीडियो बनाए। ये तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब साझा किए गए। नतीजा पहले दौर की वोटिंग में फ्लावियो बोल्सोनारो से पिछड़ने के बाद भी दूसरे दौर में बाजी पलट दी। 1989 में ब्राजील में सीधे राष्ट्रपति चुनाव शुरू हुए थे। उसके बाद यह पहली बार हुआ, जब पहले राउंड में दूसरे नंबर पर रहने वाला उम्मीदवार आखिरी राउंड में जीतकर राष्ट्रपति बना।
ट्रंप विरोधी वामपंथी विचारक लूला की जीत कई मायनों में अहम
लूला की जीत कई मायनों में अहम है। लैटिन अमेरिका में जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक और दक्षिणपंथी विचारधारा वाले नेता चुनाव जीत रहे हैं। वहीं लूला की जीत इस चलन से बिल्कुल अलग है। लूला की जीत के बाद लैटिन अमेरिका के दो सबसे ज्यादा आबादी वाले देशों, मैक्सिको और ब्राजील में वाम-मध्य विचारधारा वाले नेता सत्ता में हैं। ब्राजील लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। जिसकी GDP 2.6 ट्रिलियन डॉलर सालाना है। ऐसे में, ब्राजील के पास ट्रंप की ओर से लगाए गए भारी टैरिफ दबाव के बावजूद अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करने और स्वतंत्र आर्थिक नीति अपनाने की गुंजाइश है।

वोटिंग का समय बढ़ाने पर विवाद
हालांकि ब्राजील में वोटिंग खत्म होने से तीन मिनट पहले सुप्रीम कोर्ट के जज क्रिस्टियानो जानिन ने वोट डालने का समय दो घंटे बढ़ाने का आदेश दिया। यह फैसला दोनों उम्मीदवारों की मांग के बाद लिया गया था। लूला ने साओ पाउलो और साल्वाडोर में वोटर्स को पोलिंग बूथ तक पहुंचाने वाली बसों में परेशानी की बात कही थी। वहीं, बोल्सोनारो ने दक्षिणी ब्राजील में भारी बारिश का हवाला दिया था। हालांकि बोल्सोनारो ने वोटिंग का समय दो घंटे बढ़ाने के फैसले को अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कहा है कि वह चुनाव के दूसरे चरण के नतीजे रद्द कराने की मांग करेंगे।
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