नई दिल्ली। भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने छह महिला पहलवानों की ओर से लगाए गए आरोपों में उन्हें बरी कर दिया। हालांकि, इस फैसले के बाद भी विवाद खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। ओलंपियन पहलवान विनेश फोगाट ने साफ कर दिया है कि वह और अन्य महिला पहलवान इस फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देंगी।

फैसले के बाद विनेश फोगाट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि महिला पहलवानों ने न्याय के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है और वह आगे भी इसे जारी रखेंगी।
विनेश फोगाट ने लिखा कि एक प्रभावशाली नेता के खिलाफ आवाज उठाना आसान नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि शुरुआत से ही सत्ता और व्यवस्था बृजभूषण शरण सिंह को बचाने में लगी रही, लेकिन इसके बावजूद कई महिला पहलवानों ने हिम्मत नहीं छोड़ी और अदालत में अपनी लड़ाई जारी रखी।
उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले से उन्हें निराशा हुई है, लेकिन उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी है। महिला पहलवानों ने अपने वकीलों को फैसले के खिलाफ अपील दाखिल करने के निर्देश दे दिए हैं।
बृजभूषण बोले- मुझे खुद पर भरोसा था
अदालत के फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने इसे अपनी जीत बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें शुरुआत से विश्वास था कि वह निर्दोष साबित होंगे।

उन्होंने कहा, “मैंने पहले ही दिन कहा था कि अगर आरोप सही साबित हुए तो मैं सजा स्वीकार करूंगा। आज अदालत ने मुझे बरी कर दिया है। यह मेरे और मेरे समर्थकों के लिए खुशी का दिन है।”
जंतर-मंतर से शुरू हुई थी लड़ाई

बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ पहलवानों का आंदोलन जनवरी 2023 में शुरू हुआ था। विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया समेत कई बड़े पहलवान दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे थे।
पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर महिला खिलाड़ियों के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे और उनकी गिरफ्तारी की मांग की थी। साथ ही उन्हें भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष पद से हटाने की मांग भी उठाई गई थी।
इसके बाद खेल मंत्रालय ने मामले की जांच के लिए निगरानी समिति बनाई थी, लेकिन पहलवानों ने कार्रवाई को लेकर असंतोष जताया और अपना आंदोलन जारी रखा।
दो एफआईआर हुई थीं दर्ज
अप्रैल 2023 में छह महिला पहलवानों की शिकायत के बाद दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज किया था। सुप्रीम कोर्ट में याचिका के बाद पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज कीं।
पहली एफआईआर छह वयस्क महिला पहलवानों की शिकायत पर दर्ज की गई थी, जबकि दूसरी एफआईआर एक नाबालिग पहलवान की शिकायत पर POCSO एक्ट के तहत दर्ज हुई थी।
बाद में नाबालिग पहलवान वाले मामले में दिल्ली पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
32 गवाहों की हुई गवाही
वयस्क महिला पहलवानों से जुड़े मामले में दिल्ली पुलिस ने जून 2023 में चार्जशीट दाखिल की थी। मई 2024 में अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह और पूर्व WFI सहायक सचिव विनोद तोमर के खिलाफ आरोप तय किए थे।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 32 गवाह पेश किए। इसके बाद गवाही और अंतिम बहस की प्रक्रिया पूरी हुई। 3 अगस्त 2026 को अदालत ने फैसला सुनाते हुए बृजभूषण शरण सिंह को आरोपों से बरी कर दिया।
हालांकि, विनेश फोगाट और अन्य महिला पहलवानों के फैसले को चुनौती देने के ऐलान के बाद इस मामले की कानूनी लड़ाई अभी जारी रहने वाली है।
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