पलवल जिले में ऐतिहासिक बृज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग पूरी तरह जर्जर हो चुका है। करोड़ों की ग्रांट के बाद भी मूलभूत सुविधाओं की कमी और घटिया सड़क निर्माण को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष है।
पलवल, दीपक भारद्वाज। भगवान कृष्ण की लीला स्थली को समर्पित ऐतिहासिक बृज चौरासी कोस परिक्रमा आज से शुरू होने जा रही है, लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा के चलते परिक्रमा मार्ग विवादों के घेरे में आ गया है। जिला प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए परिक्रमा मार्ग को सुदृढ़ करने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। वर्तमान में यह महत्वपूर्ण परिक्रमा मार्ग पूरी तरह से जर्जर हो चुका है और जगह-जगह गहरे गड्ढे उभर आए हैं। इसके साथ ही, यहाँ आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए पीने के पानी और बैठने की कोई उचित व्यवस्था नहीं की गई है।
करोड़ों की सरकारी ग्रांट के बाद भी बदहाल है मार्ग
गौरतलब है कि यह ऐतिहासिक यात्रा पलवल जिले के हसनपुर से शुरू होकर लिखी, खांबी, मार्रोली, डकोरा, बंचारी, सौंध और डाडका आदि गांवों से होकर गुजरती है। इस एक माह तक चलने वाली पावन यात्रा में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु भगवान कृष्ण के लीला क्षेत्र की परिक्रमा कर पुण्य कमाते हैं। श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए हरियाणा सरकार ने करोड़ों रुपए की विशेष ग्रांट भेजी थी। इसके बावजूद, यह परिक्रमा मार्ग आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सरपंच का खुलासा: डेढ़ साल पहले भेजा था इस्टीमेट
गांव डाडका के सरपंच यूसुफ खान ने नाराजगी जताते हुए बताया कि हम बृजवासी हैं और हमारे गांव से बृज की यह ऐतिहासिक परिक्रमा निकलती है। इसके संदर्भ में उन्होंने लगभग डेढ़ साल पहले ही मार्केट कमेटी के एडीओ और जेई के माध्यम से सड़क की मरम्मत का इस्टीमेट बनवाकर चंडीगढ़ मुख्यालय भिजवा दिया था, लेकिन लंबे समय तक यह मार्ग क्षतिग्रस्त ही रहा। बाद में मार्केट कमेटी ने इस मार्ग को जिला परिषद को ट्रांसफर कर दिया। हाल ही में जिला उपायुक्त ने सभी अधिकारियों के साथ इस मार्ग का जायजा लेकर इसे जल्द दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे।
घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग भड़के स्थानीय
सरपंच ने आगे बताया कि उपायुक्त के आदेश के बाद जब आनंद-फानन में सड़क निर्माण का कार्य शुरू किया गया, तो उसमें बेहद घटिया स्तर की निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया जाने लगा। परिक्रमा मार्ग को चमकाने के नाम पर की जा रही इस खानापूर्ति को देखकर डाडका सहित कई पड़ोसी गांवों के लोगों ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य पर कड़ी आपत्ति जताई है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि करोड़ों का बजट होने के बावजूद धार्मिक मार्ग पर ऐसा घटिया काम किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता है।

