कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। Rahul Gandhi का Brijendra Singh की सद्भावना यात्रा में शामिल होना अब हरियाणा की राजनीति में बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। सवाल सिर्फ यात्रा का नहीं, बल्कि उस राजनीतिक संदेश का है जो कांग्रेस हाईकमान ने पूरे प्रदेश को देने की कोशिश की है। क्योंकि पहली बार राहुल गांधी किसी प्रदेश नेता की निजी यात्रा में इस तरह शामिल हुए और खुलकर समर्थन भी दिया। ऐसे में चर्चाएं तेज हैं कि क्या कांग्रेस अब हरियाणा में नए चेहरे की तलाश पूरी कर चुकी है?

हरियाणा कांग्रेस लंबे समय से गुटबाजी की राजनीति से जूझ रही है। Bhupinder Singh Hooda का संगठन पर मजबूत प्रभाव रहा, लेकिन लगातार चुनावी हार ने पार्टी को नए विकल्प तलाशने पर मजबूर किया है। दूसरी तरफ Kumari Selja और Randeep Singh Surjewala अपने-अपने क्षेत्रों और वोट बैंक तक सीमित दिखाई देते हैं। ऐसे में कांग्रेस को एक ऐसे चेहरे की जरूरत महसूस हो रही है जो युवा भी हो, पढ़ा-लिखा भी हो और जाट राजनीति में स्वीकार्यता भी रखता हो। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक बृजेंद्र सिंह इस फार्मूले में फिट बैठते नजर आ रहे हैं।
सबसे अहम बात यह मानी जा रही है कि राहुल गांधी ने यात्रा के दौरान सिर्फ मौजूदगी दर्ज नहीं करवाई, बल्कि खुलकर कहा कि इस यात्रा को “मेरा, हरियाणा कांग्रेस और राष्ट्रीय कांग्रेस का पूरा समर्थन है।” इन शब्दों के राजनीतिक मायने इसलिए भी ज्यादा हैं क्योंकि प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और प्रभारी जैसे बड़े नेताओं ने दूरी बनाए रखी। इससे यह संदेश भी निकाला जा रहा है कि हाईकमान अब प्रदेश की पारंपरिक गुटबाजी से ऊपर उठकर नई राजनीतिक लाइन तैयार करना चाहता है।
Brijendra Singh की हालिया हरियाणा पदयात्रा को भी कांग्रेस के अंदर गंभीरता से देखा जा रहा है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के विपरीत उन्होंने पूरे प्रदेश में सीधा जनसंपर्क करने की कोशिश की। राहुल गांधी की मौजूदगी ने इस यात्रा को राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक मान्यता दे दी है। अब चर्चा इस बात की है कि क्या आने वाले समय में बृजेंद्र सिंह को प्रदेश संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी, हरियाणा में नया चेहरा बनाया जाएगा या फिर राहुल गांधी उन्हें राष्ट्रीय कांग्रेस में कोई अहम भूमिका देंगे।
फिलहाल राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राहुल गांधी का यह कदम हरियाणा कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की शुरुआत है या फिर यह सिर्फ एक राजनीतिक संदेश भर था। लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि इस यात्रा के बाद Brijendra Singh अब हरियाणा कांग्रेस की राजनीति के केंद्र में आ चुके हैं।
