हरियाणा डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कथित तौर पर लोगों से एक वर्ष तक सोना खरीदने से परहेज करने की अपील के बाद हरियाणा के सराफा बाजारों में हलचल तेज हो गई है। अंबाला, यमुनानगर, जींद और सोनीपत के स्वर्ण व्यवसायियों ने इस पहल को राष्ट्रहित में बताया है, लेकिन इसके संभावित असर को लेकर कारोबारियों में चिंता भी देखने को मिल रही है।
पहले से ही ऊंची कीमतों के चलते मंदी का सामना कर रहे सराफा बाजार में अब निवेश के उद्देश्य से होने वाली खरीदारी और कम होने की आशंका जताई जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि विवाह और पारिवारिक जरूरतों के लिए सोने की खरीद पूरी तरह रुकना संभव नहीं है, लेकिन निवेश करने वाले ग्राहक अपनी खरीद को टाल सकते हैं।
अंबाला के सराफा व्यापारियों के अनुसार, बाजार पहले ही बढ़ती कीमतों के दबाव में है। वहीं सोनीपत और जींद के स्वर्णकारों ने कहा कि विदेशी मुद्रा बचाने और आर्थिक मजबूती के उद्देश्य से यह सोच सराहनीय हो सकती है, लेकिन लंबे समय तक मांग में गिरावट कारोबार के लिए चुनौती बन सकती है।
सराफा संगठनों ने सरकार से अपील की है कि नीति बनाते समय संतुलन रखा जाए और व्यापारिक हितों पर भी ध्यान दिया जाए।
छोटे कारोबारियों पर पड़ सकता है बड़ा असर
व्यापारियों के अनुसार, सोने की मांग में कमी का सीधा असर छोटे दुकानदारों, कारीगरों और आभूषण निर्माण से जुड़े श्रमिकों पर पड़ सकता है। हरियाणा के कई जिलों में हजारों परिवार इस उद्योग से आजीविका चलाते हैं।
व्यापारियों ने सरकार से अनुरोध किया है कि विदेशी मुद्रा बचत के साथ-साथ रोजगार सुरक्षा और पारंपरिक आभूषण उद्योग की स्थिरता पर भी ध्यान दिया जाए, क्योंकि लंबे समय तक मंदी स्थानीय बाजारों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।

