कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। खेतों से उठने वाला धुआं पिछले एक महीने तक हरियाणा में चिंता की बड़ी वजह बना रहा। कई जिलों में हालात ऐसे रहे कि खेतों के ऊपर धुएं की परत दिखाई देती थी। प्रशासन की सख्ती, जागरूकता अभियान और जुर्माने के बावजूद किसानों ने लगातार गेहूं के फाने जलाए। यही कारण रहा कि इस बार फसल अवशेष जलाने के आंकड़ों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी और पांच साल का रिकॉर्ड टूट गया।

1 अप्रैल से 9 मई 2026 तक हरियाणा में गेहूं के फसल अवशेष जलाने के कुल 3097 मामले दर्ज हुए। यह पिछले पांच वर्षों का सबसे बड़ा आंकड़ा रहा। चौंकाने वाली बात यह रही कि 2025 में इसी अवधि में केवल 1055 मामले सामने आए थे, यानी इस साल मामलों में लगभग तीन गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई। शनिवार को अकेले 102 नए मामले सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में भी हलचल बढ़ गई।

सबसे ज्यादा मामले Jind जिले में दर्ज किए गए, जहां 479 घटनाएं सामने आईं। इसके बाद Rohtak में 418, Jhajjar में 314 और Sonipat में 271 मामले दर्ज हुए। कई जिलों में यह संख्या पिछले साल के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा पहुंच गई।
अगर पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2022 में 2712 मामले सामने आए थे। इसके बाद 2023 में यह घटकर 1363 रह गए। 2024 में फिर बढ़ोतरी हुई और संख्या 2130 तक पहुंच गई, जबकि 2025 में यह आंकड़ा घटकर 1055 रह गया था। लेकिन 2026 में अब पांच साल का सबसे बड़ा आंकड़ा दर्ज हुआ।

विशेषज्ञों के अनुसार फसल अवशेष जलाने से सिर्फ पर्यावरण ही प्रभावित नहीं हुआ, बल्कि मिट्टी की उर्वरता पर भी असर पड़ा। वहीं लगातार बढ़ते मामलों ने प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी। अब सवाल यही है कि आने वाले सीजन में सरकार इस समस्या पर कैसे लगाम लगाएगी।