बक्सर। भगवान विश्वामित्र की पावन तपोभूमि बक्सर की प्राचीन और ऐतिहासिक मिठाई बक्सर की पापड़ी को उसका खोया हुआ गौरव दिलाने के लिए विश्वामित्र सेना ने मोर्चा खोल दिया है। बक्सर की इस पारंपरिक पहचान को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित करने इसे GI टैग (Geographical Indication) दिलाने और वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना में शामिल करने की मांग को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित की गई।
विरासत को बचाने का संकल्प
प्रेस वार्ता की अध्यक्षता करते हुए विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय संयोजक राजकुमार चौबे ने कहा कि बक्सर की पापड़ी केवल एक मिठाई नहीं बल्कि जिले की सांस्कृतिक विरासत है। उन्होंने स्मरण दिलाया कि कभी यह मिठाई अपनी विशिष्टता के कारण देशभर में प्रसिद्ध थी और पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की पसंदीदा मिठाइयों में से एक थी। हालांकि प्रशासनिक उपेक्षा के कारण आज यह अपनी पहचान खोने की कगार पर है। चौबे ने स्पष्ट कहा कि अब समय आ गया है कि इस पारंपरिक उद्योग को पुनर्जीवित किया जाए।
रोजगार के नए अवसर और आर्थिक सुदृढ़ीकरण
श्री चौबे ने जोर देकर कहा कि यदि सरकार ‘बक्सर की पापड़ी’ को GI टैग प्रदान कर उसे ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ सूची में शामिल करती है, तो इसके दूरगामी सकारात्मक परिणाम होंगे। इससे न केवल बक्सर को एक नई वैश्विक पहचान मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार मिथिला मखाने ने विश्व भर में अपनी धाक जमाई है, बक्सर की पापड़ी भी अपनी गुणवत्ता के दम पर वही स्थान पाने की पूर्णतः हकदार है। इससे जिले के युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के द्वार खुलेंगे, जिससे बक्सर की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्राप्त होगी।
सरकार को दी जनआंदोलन की चेतावनी
विश्वामित्र सेना ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने बक्सर की इस ऐतिहासिक मांग को नजरअंदाज किया, तो संगठन चुप नहीं बैठेगा। चौबे ने कहा यह बक्सर के सम्मान और स्वाभिमान का प्रश्न है। हम सरकार से मांग करते हैं कि इसे प्राथमिकता के आधार पर योजनाबद्ध तरीके से प्रमोट करें। यदि शीघ्र ही सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो विश्वामित्र सेना उग्र जनआंदोलन करने के लिए बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
इस प्रेस वार्ता में स्थानीय व्यापारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने एकमत होकर इस अभियान का समर्थन किया और इस मुहिम को गांव-गांव तक ले जाने का संकल्प लिया।

