रांची। झारखंड में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और विभागीय व्यवस्था को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की रिपोर्ट ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मंगलवार को विधानसभा में पेश की गई रिपोर्ट में परिवहन, ग्रामीण विकास, पेयजल, उत्पाद और वाणिज्य कर विभाग में नियमों की अनदेखी और वित्तीय प्रबंधन में खामियों का उल्लेख किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2025 तक 1.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि से जुड़े उपयोगिता प्रमाण-पत्र लंबित थे। वहीं मनरेगा से लेकर प्रधानमंत्री आवास योजना और जल जीवन मिशन तक कई योजनाओं में लक्ष्य और जमीनी उपलब्धि के बीच बड़ा अंतर सामने आया है।

नाबालिगों को जारी कर दिया गियर वाली बाइक का लाइसेंस

CAG ऑडिट में परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं। पांच जिलों में 18 वर्ष से कम उम्र के 305 लोगों को गियर वाली मोटरसाइकिल का ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जाने का मामला सामने आया।

रिपोर्ट में इसके पीछे सारथी सॉफ्टवेयर में तकनीकी गड़बड़ी को वजह बताया गया है। इसके अलावा 6,640 ऐसे वाहन भी मिले, जिनका अस्थायी पंजीकरण होने के बाद स्थायी पंजीकरण नहीं कराया गया।

वहीं 1.24 लाख वाहनों का टैक्स बकाया पाया गया। इससे 11.24 करोड़ रुपये की संभावित राजस्व वसूली प्रभावित होने की बात रिपोर्ट में कही गई है।

मनरेगा में काम अधूरे, 2,633 करोड़ रुपये खर्च

मनरेगा को लेकर भी ऑडिट में तस्वीर चिंताजनक बताई गई है। वर्ष 2019 से 2024 के बीच प्रस्तावित कार्यों में सिर्फ 27 प्रतिशत काम पूरे हो सके। करीब 50.21 लाख काम अधूरे रह गए।

इन कार्यों पर करीब 2,633 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके थे। इसके अलावा मार्च 2025 तक मजदूरों की 321.84 करोड़ रुपये की मजदूरी का भुगतान लंबित था।

ऑडिट में मनरेगा की राशि से वाहनों की मरम्मत और आउटसोर्सिंग एजेंसियों के कर्मचारियों को भुगतान किए जाने के मामले भी सामने आए।

PM आवास में पात्र छूटे, अपात्रों को मिला लाभ

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में लाभुकों के चयन और लक्ष्य निर्धारण पर भी CAG ने सवाल उठाए हैं।राज्य में 22.34 लाख पात्र परिवारों की पहचान की गई थी, लेकिन 16.02 लाख परिवारों का ही लक्ष्य मिला। यानी 6.32 लाख पात्र परिवार योजना के लक्ष्य से बाहर रह गए।

दूसरी तरफ, लाभुकों की सूची में 2.90 लाख अपात्र लोगों के नाम शामिल कर दिए गए थे। बाद में इन नामों को हटाया गया।रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि योजना के तहत पूर्ण किए गए करीब 8 प्रतिशत आवासों में शौचालय की सुविधा नहीं थी।

जल जीवन मिशन में भी लक्ष्य अधूरा

जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन में भी राज्य की स्थिति राष्ट्रीय औसत से पीछे मिली। रिपोर्ट के अनुसार केवल 55 प्रतिशत ग्रामीण घरों तक नल से जल पहुंच पाया था, जबकि राष्ट्रीय औसत करीब 80 प्रतिशत बताया गया है।इतना ही नहीं, राज्य के 24 प्रतिशत गांव ऐसे थे जहां एक भी घर में नल कनेक्शन नहीं था।

शराब दुकानदारों पर कार्रवाई नहीं, 8.35 करोड़ का राजस्व प्रभावित

उत्पाद विभाग में भी नियमों के पालन को लेकर सवाल उठे हैं। निर्धारित न्यूनतम स्टॉक नहीं रखने वाले शराब विक्रेताओं पर 8.35 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जाना था, लेकिन विभाग ने यह राशि वसूल नहीं की।CAG के मुताबिक नियमों के उल्लंघन के बावजूद दंडात्मक कार्रवाई नहीं होने से सरकार को राजस्व नुकसान हुआ।

GST में 343.58 करोड़ की विसंगति

वाणिज्य कर विभाग में GST और ई-वे बिल के आंकड़ों की जांच के दौरान 343.58 करोड़ रुपये की कर देयता और इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़ी विसंगतियां सामने आईं।

ऑडिट में 23 बड़े करदाताओं का मामला भी सामने आया। इन करदाताओं ने आयकर रिटर्न में 95.43 करोड़ रुपये की बिक्री घोषित की, लेकिन GST के तहत उनका पंजीकरण नहीं था।

1.60 लाख करोड़ से ज्यादा के उपयोगिता प्रमाण-पत्र लंबित

राज्य के वित्तीय प्रबंधन को लेकर CAG ने सबसे बड़ा सवाल उपयोगिता प्रमाण-पत्रों को लेकर उठाया है। मार्च 2025 तक 1,60,565.80 करोड़ रुपये की राशि से जुड़े उपयोगिता प्रमाण-पत्र लंबित थे।

इसका मतलब है कि बड़ी रकम खर्च किए जाने के बावजूद संबंधित विभाग यह प्रमाणित नहीं कर सके कि राशि का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के लिए हुआ या नहीं।

वहीं वर्ष 2024-25 में राज्य का पूंजीगत व्यय पिछले वर्ष की तुलना में 2,160 करोड़ रुपये कम रहा। CAG के अनुसार इसका असर विकास कार्यों और परिसंपत्तियों के निर्माण पर पड़ सकता है।

CAG रिपोर्ट ने बढ़ाई विभागों की जवाबदेही

CAG की इस रिपोर्ट में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से लेकर राजस्व संग्रह और वित्तीय अनुशासन तक कई स्तरों पर खामियां सामने आई हैं। अब रिपोर्ट विधानसभा में रखे जाने के बाद संबंधित विभागों की जवाबदेही और इन आपत्तियों पर सरकार की कार्रवाई अहम होगी।