अडानी रियलिटी में काम करने वाले मैनेजर युवराज (Yuvraj) की हत्या के मामले की जांच के दौरान पुलिस के सामने कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। हत्याकांड में गिरफ्तार अन्या वत्स के खिलाफ पहले भी ठगी का एक मामला दर्ज हो चुका है। पुलिस के मुताबिक, यह मामला दिल्ली के संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। आरोप है कि अन्या वत्स खुद को सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को उनके काम करवाने का झांसा देती थी। इसके बदले वह उनसे कथित तौर पर मोटी रकम लेती थी।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अन्या वत्स कथित तौर पर सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को फोन करती थी। वह दावा करती थी कि अपने पद और संपर्कों का इस्तेमाल कर संबंधित व्यक्ति का काम करवा सकती है। आरोप है कि इसके बदले वह लोगों से पैसे लेती थी और रकम मिलने के बाद गायब हो जाती थी। ठगी के शिकार कई लोगों ने कुछ समय पहले संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में शिकायतें दी थीं। इन शिकायतों के आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज की थी। सूत्रों के अनुसार, पुराने मामले में कई लोगों से लाखों रुपये की कथित ठगी किए जाने की शिकायत सामने आई थी।

पुराने केस और युवराज हत्याकांड की भी जांच

युवराज हत्याकांड में अन्या वत्स की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब उसके खिलाफ दर्ज पुराने ठगी के मामले और हत्या के केस के बीच संभावित कड़ी की भी जांच कर रही है। हालांकि, दोनों मामलों के बीच किसी सीधे संबंध की अभी पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस के मुताबिक, इस संबंध में स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

फाइनेंशियल डिस्प्यूट का एंगल भी सामने आया

युवराज हत्याकांड की अब तक की पूछताछ में पुलिस के सामने हत्या के पीछे कथित वित्तीय विवाद की बात सामने आई है। पुलिस इस एंगल से जांच कर रही है कि युवराज और आरोपियों के बीच पैसों को लेकर किस तरह का विवाद था। विवाद की वास्तविक वजह और इसमें शामिल रकम के बारे में पुलिस आगे की पूछताछ के आधार पर जानकारी जुटा रही है। पूछताछ में अन्या वत्स ने कथित तौर पर पुलिस को बताया है कि उसी ने युवराज को फोन कर गुरुग्राम बुलाया था। इसके बाद युवराज अपनी कार से गुरुग्राम पहुंचा। पुलिस के मुताबिक, वहां अन्या वत्स, उसके दोस्त और युवराज के बीच किसी बात को लेकर बहस हुई थी। इसके बाद घटनाक्रम ने गंभीर रूप ले लिया।

अन्या ने युवराज को गोली मारने का दावा किया

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान अन्या वत्स ने कथित तौर पर दावा किया कि उसी ने युवराज को गोली मारी थी। उसका यह भी दावा है कि गोली चलाने के बाद उसने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर युवराज के शव को ठिकाने लगाया। हालांकि, पुलिस उसके बयान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि कर रही है और हत्या में दोनों आरोपियों की भूमिका की जांच जारी है।

गुरुग्राम में मिला था युवराज का शव

पुलिस के अनुसार, युवराज का शव गुरुग्राम में बरामद हुआ था। शव को कई दिनों तक रखे जाने के बाद गुरुग्राम पुलिस ने उसका पोस्टमार्टम कराया और अंतिम संस्कार भी कर दिया। वहीं, युवराज के लापता होने के बाद दिल्ली पुलिस ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की थी। पुलिस के मुताबिक, गुरुग्राम में शव मिलने और अंतिम संस्कार हो जाने के बावजूद दिल्ली पुलिस को इसकी जानकारी तत्काल नहीं मिल सकी थी।

कई दिन बाद खुला हत्याकांड का राज

इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि युवराज का शव मिलने के बाद उसका पोस्टमार्टम कराया गया और अंतिम संस्कार भी हो गया था। इसके कई दिन बाद हत्या की पूरी घटना का खुलासा हुआ। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई और अन्या वत्स और उसके दोस्त को गिरफ्तार किया। पुलिस ने युवराज की कार भी बरामद कर ली है। अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हत्या के बाद आरोपियों ने कथित तौर पर सबूत छिपाने और शव को ठिकाने लगाने के लिए क्या-क्या किया। इसके साथ ही पुलिस वारदात में इस्तेमाल हथियार की तलाश कर रही है।

पूछताछ में गुमराह करने का आरोप

पुलिस का दावा है कि अन्या वत्स और उसका साथी पूछताछ के दौरान जांच को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस दोनों के बयानों का दूसरे सबूतों और घटनाक्रम से मिलान कर रही है। जांच में हत्या के पीछे की वजह, गोली चलाए जाने की परिस्थितियों और शव को ठिकाने लगाने में दोनों आरोपियों की भूमिका का पता लगाया जा रहा है। फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस अन्या वत्स के पुराने ठगी के मामले, युवराज के साथ कथित वित्तीय विवाद, उसे गुरुग्राम बुलाए जाने और हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने की पूरी कड़ी को जोड़ने की कोशिश कर रही है।

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