कैथल में विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर चलाए गए अभियान के तहत तीन बच्चों को मुक्त कराया गया और दो गुमशुदा बच्चों को परिजनों से मिलाया गया।

राकेश कथूरिया,कैथल। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के उपलक्ष्य में कैथल में एमडीडी ऑफ इंडिया और जिला प्रशासन ने संयुक्त रूप से बाल श्रम के खिलाफ एक व्यापक जागरूकता अभियान का संचालन किया। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के ‘रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन 4.0’ अभियान के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम की कमान बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष भीम सेन अग्रवाल ने संभाली। अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज में व्याप्त बाल श्रम जैसी कुरीति को जड़ से समाप्त करना और बच्चों को उनके मौलिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। इस दौरान दुकानदारों और आम नागरिकों को बाल श्रम के कानूनी प्रावधानों व इसके दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

बच्चों को मुक्त कराकर शुरू पुनर्वास

अभियान के दौरान टीम ने कैथल के विभिन्न इलाकों में औचक निरीक्षण किया, जिसमें तीन बाल श्रमिकों को विभिन्न कार्यस्थलों से सुरक्षित मुक्त कराया गया। इन बच्चों को अब मुख्यधारा से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि उन्हें शिक्षा और एक सुरक्षित माहौल मिल सके। वहीं, टीम ने बड़ी मानवीय पहल दिखाते हुए दो गुमशुदा बच्चों को ढूंढ निकाला और उन्हें उनके माता-पिता से सकुशल मिलवाया। इस सुखद घटना से प्रभावित परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई। निरीक्षण टीम में श्रम निरीक्षक अजीत, एएचटीयू से एसआई रमेश, एसआई मदन लाल, सदस्य रितु सिंगला और अधिवक्ता हर्ष बागड़ी सहित एमडीडी इंडिया के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

हेल्पलाइन नंबर पर दें शोषण की सूचना

प्रशासन ने आम जनता से अपील करते हुए कहा कि बाल श्रम, भिक्षावृत्ति या बच्चों के शोषण की सूचना मिलने पर तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर सूचित करें। समाज के जागरूक नागरिकों का सहयोग ही बाल अधिकारों की रक्षा को सुनिश्चित कर सकता है। अध्यक्ष भीम सेन अग्रवाल ने दुकानदारों से बच्चों को मजदूरी पर न लगाने और उन्हें शिक्षा के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया। बाल कल्याण समिति और जिला प्रशासन का यह प्रयास भविष्य में भी जारी रहेगा ताकि हर बच्चा सुरक्षित वातावरण में पढ़-लिख सके। कैथल में चलाए गए इस रेस्क्यू अभियान ने न केवल पीड़ित बच्चों को नया जीवन दिया, बल्कि समाज को एक सकारात्मक संदेश भी दिया है।