आशुतोष तिवारी, जगदलपुर। बस्तर में अब विकास के साथ विरासत संरक्षण पर भी खास जोर दिया जा रहा है। ज्ञानभारतम अभियान के तहत जिले में प्राचीन पांडुलिपियों और ताड़पत्रों को सहेजने का बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। अब तक जिले में 450 से अधिक ताड़पत्र होने की जानकारी सामने आई है, जो बस्तर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाता है।
जिला प्रशासन ने इस कार्य को व्यवस्थित रूप देने के लिए मार्च महीने में जिला स्तरीय समिति का गठन किया था। आधुनिक तकनीक के जरिए ज्ञानभारतम मोबाइल ऐप से अब तक 100 से ज्यादा ताड़पत्रों की स्कैनिंग भी पूरी की जा चुकी है। खास बात यह है कि अब तक मिले कई पांडुलिपि ओड़िया भाषा में लिखे पाए गए हैं, जिससे क्षेत्र के पुराने सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों की झलक मिलती है।


कलेक्टर आकाश छिकारा और एसपी शलभ सिंहा ने पांडुलिपियों को सुरक्षित रखने वाले परिवारों से मुलाकात कर दस्तावेजों की जानकारी ली। अधिकारियों ने कहा कि ये सिर्फ कागज या ताड़पत्र नहीं, बल्कि बस्तर की पहचान, इतिहास और आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर है।
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