अजयारविंद नामदेव, शहडोल। मध्य प्रदेश के आदिवासी अंचल शहडोल ने जल संरक्षण के क्षेत्र में एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी गूंज अब पूरे देश में सुनाई दे रही है। भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के जल संचय जन भागीदारी अभियान में शहडोल ने देश के टॉप-10 जिलों में जगह बनाकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस सफलता के पीछे जनभागीदारी, तकनीक आधारित निगरानी और प्रशासन की सख्त मॉनिटरिंग की अहम भूमिका रही है।

शहडोल जिले में अभियान की शुरुआत जनवरी माह से ही कर दी गई थी, जिला पंचायत सीईओ शिवम प्रजापति ने इंजीनियरों और मैदानी अमले को प्रतिदिन फील्ड में पहुंचकर कार्यों की निगरानी के निर्देश दिए। खास बात यह रही कि हर दिन सुबह 10 बजे और शाम 7 बजे इंजीनियरों को कार्यस्थल से वीडियो कॉल के माध्यम से प्रगति रिपोर्ट देना अनिवार्य किया गया। इस व्यवस्था से न केवल कार्यों की गुणवत्ता बनी रही, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित हुई।

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390 ग्राम पंचायतों में व्यापक स्तर पर हो रहा काम

अभियान के तहत जिले में अब तक डेढ़ लाख से अधिक जल संरचनाओं का पुनर्जीवन, 10 हजार से ज्यादा सोक पीट और 1500 से अधिक वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं का निर्माण किया जा चुका है। वहीं कार्यों के दस्तावेजीकरण के लिए 1 लाख 60 हजार से अधिक फोटो पोर्टल पर अपलोड किए गए हैं। इस मुहिम को केवल सरकारी योजना तक सीमित नहीं रखा गया। शिक्षकों, आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों को भी अभियान से जोड़कर इसे जनआंदोलन का स्वरूप दिया गया। जिले की 390 ग्राम पंचायतों में जल संरक्षण को लेकर व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं।

देश के लिए प्रेरणादायी मॉडल

कैच द रेन, व्हेयर इट फॉल, व्हेन इट फॉल थीम पर चल रहे इस अभियान का असर अब गांव-गांव में दिखाई देने लगा है। तालाबों का गहरीकरण, कुओं की सफाई और वर्षाजल संरक्षण के ढांचे ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर बदल रहे हैं। शहडोल की यह पहल अब प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायी मॉडल बन चुकी है।

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