बहुचर्चित सुमेध गुलाटी किडनैपिंग और कस्टडी से फरार कराने के मामले में सीबीआई कोर्ट ने आईजी गौतम चीमा समेत 6 आरोपियों को बेनिफिट ऑफ डाउट का लाभदेकर बरी कर दिया। सीबीआई कोर्ट ने लोअर कोर्ट के उस फैसले को खारिज कर दिया जिसमें आरोपियों को दोषी ठहराया गया था।
मामला 26 अगस्त, 2014 का है, जब फेज-1 के थाने से एक पीओ गुलाटी को कथित तौर पर आईजी चीमा और उनके साथियों द्वारा पुलिस कस्टडी से जबरन छुड़ाने का आरोप लगा था।
आरोप था कि गुलाटी को फेज-6 के मैक्स अस्पताल लाया गया, वहां उसके साथ मारपीट की गई और एक महिला को शिकायत वापस लेने के लिए धमकाया गया। बाद में पुलिस अस्पताल पहुंची और गुलाटी को फिर हिरासत में लिया था। 30 अगस्त को फेज-1 थाना मोहाली में केस दर्ज हुआ था। बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।

लोअर कोर्ट ने 20 दिसंबर, 2024 को गौतम चीमा, अजय चौधरी, रश्मि नेगी, वरुण उत्तरेजा, विक्की वर्मा और आर्यन सिंह को दोषी ठहराया था। कोर्ट ने कहा कि प्रॉसीक्यूशन अपना केस साबित करने में नाकाम रहा है। कोर्ट ने पाया कि मुख्य गवाह, जिनमें खुद गुलाटी और ड्यूटी पर तैनात कोई पुलिस अधिकारी शामिल थे, कोर्ट में अगवाही से मुकर गए और किसी आरोपी की पहचान नहीं कर सके।
ड्यूटी ऑफिसर एएसआई दिलबाग सिंह ने माना कि उन्होंने गुलाटी की पहचान की पुष्टि के लिए कोई दस्तावेज नहीं लिया था और न ही शिनाख्त परेड कराई गई।कोर्ट ने नोट किया कि पुलिस की डीडीआर में समय और घटनाओं को लेकर काफी विरोधाभास था, जिससे पुलिस की कहानी संदिग्ध हो गई। कोर्ट में कुल 42 गवाह पेश किए गए, जो अपने पुराने बयानों से पलट गए। बचाव पक्ष से 10 गवाह पेश किए गए। कोर्ट ने माना कि गवाहों की संख्या से ज्यादा उनकी गवाही की गुणवत्ता मायने रखती है।
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