वीरेंद्र कुमार, नालंदा। जिले के बिहारशरीफ स्थित नवजीवन शिशु अस्पताल से जुड़े एक नवजात मामले में पटना हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस मामले में हुई कथित लापरवाही, दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर हेराफेरी और नवजात की पहचान को लेकर उठे गंभीर सवालों पर गहरी नाराजगी जताई है। यह पूरा मामला क्रिमिनल रिट क्षेत्राधिकार मामला से जुड़ा है।

जन्म और अस्पताल के रिकॉर्ड में सनसनीखेज छेड़छाड़
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पीड़ित नवजात का जन्म 25 मार्च 2023 को गिरियक के एक सरकारी अस्पताल में हुआ था, जिसके बाद बेहतर इलाज के नाम पर उसे बिहारशरीफ के निजी अस्पतालों में रेफर किया गया था। नवजीवन शिशु अस्पताल में इलाज के दौरान परिवार ने बच्चे की पहचान को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए, जिसके बाद विवाद गहराता चला गया।
जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि अस्पताल के रिकॉर्ड में बच्चे के लिंग कॉलम में ‘Male’ को काटकर ‘Female’ कर दिया गया था। दस्तावेजों में इस तरह की खुली ओवरराइटिंग और जालसाजी ने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया है। जिला स्तर की शुरुआती जांच में ही यह स्पष्ट हो गया था कि इस मामले की तह तक जाने के लिए दस्तावेजों की फोरेंसिक और हैंडराइटिंग जांच बेहद जरूरी है।
डीएनए रिपोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देश
इस मामले में सच्चाई सामने लाने के लिए DNA जांच भी कराई गई थी। हाईकोर्ट के 21 अप्रैल 2026 के आदेश के मुताबिक, डीएनए रिपोर्ट ने उस महिला के जैविक रूप से बच्चे की मां होने की संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसे अब तक कथित मां बताया जा रहा था। इस खुलासे के बाद अदालत ने मामले की गंभीरता को समझते हुए नालंदा के पुलिस अधीक्षक (SP) को व्यक्तिगत रूप से इस केस की समीक्षा करने और जांच को जल्द से जल्द तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने का सख्त निर्देश दिया है। इससे पहले अदालत ने पटना FSL में डीएनए सैंपल भेजने के भी आदेश दिए थे।
प्रशासनिक कार्रवाई और कानूनी पहलू
अब पुलिस प्रशासन की ओर से आरोपी अस्पताल के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई का प्रस्ताव भेजा गया है, और जिलाधिकारी से कानून के दायरे में रहकर सख्त कदम उठाने की उम्मीद जताई जा रही है।
हालांकि, इस पूरे प्रकरण में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि नवजात की कथित तस्करी या बच्चे की अवैध बिक्री को अभी तक अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता है; यह पूरी तरह न्यायिक प्रक्रिया और जांच का विषय है। सुप्रीम कोर्ट ने 2025 के ‘पिंकी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ मामले में बाल तस्करी से जुड़े मामलों में त्वरित और सख्त कार्रवाई करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया था। फिलहाल, अदालत की कड़ी नजर इस बात पर टिकी है कि पुलिस और प्रशासन इस मामले में आगे क्या सख्त कदम उठाते हैं।


