वीरेंद्र गहवई, बिलासपुर। हाईकोर्ट ने जांजगीर-चांपा जिले के एक अतिक्रमण मामले में याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने प्रशासन को फिलहाल कोई कठोर कार्रवाई नहीं करने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने कहा है कि जब तक राजस्व मंडल में लंबित स्थगन आवेदन पर फैसला नहीं हो जाता तब तक याचिकाकर्ता के खिलाफ अतिक्रमण हटाने या निर्माण तोड़ने जैसी कार्रवाई नहीं की जाए। न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने यह आदेश रामप्रसाद राही द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद पारित किया।
याचिकाकर्ता रामप्रसाद राही, निवासी ग्राम मिसदा, तहसील शिवरीनारायण, जिला जांजगीर-चांपा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 27 मई 2026 को जारी नोटिस को निरस्त करने की मांग की थी। यह नोटिस नायब तहसीलदार द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के संबंध में जारी किया गया था। याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि बिलासपुर संभाग के आयुक्त ने 7 अप्रैल 2026 को अतिक्रमण हटाने का आदेश पारित किया था। इस आदेश के खिलाफ उन्होंने छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 50 के तहत 1 जून 2026 को राजस्व मंडल में पुनरीक्षण याचिका दायर की है।

याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि पुनरीक्षण याचिका के साथ अंतरिम स्थगन (स्टे) का आवेदन भी प्रस्तुत किया गया है, जिस पर अभी सुनवाई होना बाकी है। इसके बावजूद स्थानीय राजस्व अधिकारी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई आगे बढ़ा रहे हैं, जिससे उन्हें बेदखल किए जाने और निर्माण ध्वस्त किए जाने की आशंका है। राज्य शासन की ओर से पेश अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि राजस्व मंडल में याचिकाकर्ता का मामला विचाराधीन है और स्थगन आवेदन पर सुनवाई के लिए 8 जून 2026 की तारीख निर्धारित की गई है।
मामले की परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने नायब तहसीलदार शिवरीनारायण को निर्देश दिया कि राजस्व मंडल में लंबित स्थगन आवेदन पर निर्णय होने तक याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई दंडात्मक या जबरन कार्रवाई न की जाए। अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता अपने पुनरीक्षण प्रकरण और स्थगन आवेदन की सुनवाई में सक्रिय रूप से सहयोग करें।
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