शिवम मिश्रा, रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGPSC घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने एडिशनल कलेक्टर और मुख्यमंत्री कार्यालय के तत्कालीन OSD रहे चेतन बोरघरिया की गिरफ्तारी के बाद कई बड़े खुलासे किए हैं. ED के मुताबिक, बोरघरिया को सात दिन की कस्टोडियल रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। एजेंसी का दावा है कि CGPSC की 2020 और 2021 की परीक्षाओं में कथित प्रश्नपत्र लीक, उम्मीदवारों से अवैध रकम की वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले की जांच में बोरघरिया की भूमिका सामने आई है.

ED के मुताबिक, मामले की जांच की शुरुआत EOW रायपुर में दर्ज FIR के आधार पर हुई थी. इसी मामले में CBI भी जांच कर चुकी है और तत्कालीन PSC अध्यक्ष समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है. जांच एजेंसी का दावा है कि उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने CGPSC परीक्षा-2021 के कई उम्मीदवारों से कथित तौर पर तीन करोड़ रुपये से ज्यादा की अवैध रकम जुटाई. आरोप है कि उम्मीदवारों को प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और परीक्षा में चयन सुनिश्चित कराने के नाम पर यह रकम ली गई.

ED के अनुसार जांच में यह भी सामने आया कि कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले कथित तौर पर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए गए. एजेंसी का दावा है कि उम्मीदवारों को रायपुर के सिद्धि विनायक मैरिज पैलेस ले जाया गया, जहां प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने की बात सामने आई. इसके बाद मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्रों के आधार पर कथित तौर पर कोचिंग देने के लिए उम्मीदवारों को महासमुंद जिले के बारनवापारा अभयारण्य के आसपास स्थित एक सैंक्चुअरी रिजॉर्ट ले जाने का भी आरोप है. अब इस पूरे मामले में चेतन बोरघरिया की भूमिका को लेकर भी ED ने बड़ा दावा किया है.

बोरघरिया के खाते में 66 लाख 64 हजार रुपए का लेन-देन

ED के मुताबिक, संबंधित अवधि के दौरान बोरघरिया के बैंक खाते में 170 अलग-अलग लेन-देन के जरिए कुल 66 लाख 64 हजार रुपये जमा हुए. एजेंसी ने एक सितंबर को बोरघरिया से जुड़े परिसरों में दबिश दी थी और तलाशी के दौरान मोबाइल फोन समेत कई डिजिटल उपकरण बरामद किए. ED का कहना है कि इन डिजिटल उपकरणों से बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच कथित बातचीत सामने आई है. एजेंसी के मुताबिक, इन बातचीत में रकम की वापसी और भुगतान की मांग से जुड़ी बातें मिली हैं.

OPC के जरिए वित्तीय लेन-देन की मिली जानकारी

जांच में मेसर्स फ़िगरकेव ई-कॉम (OPC) प्राइवेट लिमिटेड के जरिए हुए वित्तीय लेन-देन की भी जानकारी सामने आने की बात ED ने कही है. एजेंसी का आरोप है कि इस कंपनी का इस्तेमाल कथित तौर पर अपराध से अर्जित धन को जमा करने और अलग-अलग लेन-देन के जरिए घुमाने के लिए किया गया. ED के मुताबिक, डिजिटल साक्ष्यों, बैंक लेन-देन और जांच के दौरान दर्ज बयानों के आधार पर चेतन बोरघरिया को अपराध से अर्जित धन के कथित अधिग्रहण, कब्जे और इस्तेमाल से जुड़ी गतिविधियों में शामिल पाया गया है.

सात दिन की ED कस्टडी में है बोरघरिया

फिलहाल चेतन बोरघरिया सात दिन की ED कस्टडी में है और एजेंसी उनसे पूछताछ कर रही है. हालांकि ED ने साफ किया है कि मामले की जांच अभी जारी है. जांच पूरी होने और अदालत में आरोपों के परीक्षण के बाद ही पूरे मामले की अंतिम तस्वीर स्पष्ट होगी. CGPSC घोटाले की जांच में अब ED के इन खुलासों ने मामले को और गंभीर बना दिया है.

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