कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। चंडीगढ़ में अपराधियों ने जबरन वसूली (रंगदारी) के लिए अब एक नया और खतरनाक ‘डिजिटल हथकंडा’ अपनाना शुरू कर दिया है। शहर के कैमिस्टों को डराने के बाद, अब एक अज्ञात गिरोह ने सीधे डॉक्टरों को अपने रडार पर ले लिया है। पिछले 24 घंटों के भीतर शहर के अलग-अलग सेक्टरों के चार प्रतिष्ठित डॉक्टरों से व्हाट्सएप के जरिए 50-50 हजार रुपये की रंगदारी मांगी गई है।
इस पूरी वारदात का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि बदमाशों ने कैश की मांग न करके, डॉक्टरों के व्हाट्सएप पर ‘QR कोड’ भेजा है और शाम 7 बजे तक पैसे ट्रांसफर करने की डेडलाइन दी है।
साइबर क्रिमिनल्स का नया मॉडस ऑपेरंडी (काम करने का तरीका)
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह मामला केवल रंगदारी का नहीं बल्कि ‘क्रॉस-स्टेट साइबर क्राइम’ का नेटवर्क लग रहा है। अपराधियों ने चंडीगढ़ के डॉक्टरों को डराने के लिए जिस मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया, वह महाराष्ट्र के रहने वाले ‘सचिन सावंत’ नाम के व्यक्ति के नाम पर रजिस्टर्ड है। पुलिस अब इस उलझन को सुलझाने में जुटी है कि क्या सचिन सावंत का फोन हैक या क्लोन किया गया है, या फिर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यह सिम कार्ड जारी कराया गया था।
दया गुजर ग्रुप’ के नाम का खौफ
धमकी भरे कॉल और चैट्स में बदमाशों ने खुद को ‘दया गुजर ग्रुप’ से जुड़ा हुआ बताया है। पैसे न देने पर डॉक्टरों को गंभीर परिणाम भुगतने और क्लीनिक बंद कराने की सीधी धमकी दी जा रही है। सेक्टर-40 के एक डॉक्टर ने जब सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत उस नंबर को ब्लॉक किया, तो आरोपी ने ‘डिलीट फॉर एवरीवन’ फीचर का इस्तेमाल कर अपने भेजे गए मैसेज मिटा दिए, जो यह दिखाता है कि अपराधी तकनीकी रूप से काफी चालाक हैं।
ट्रैक पर पुलिस: डिजिटल फुटप्रिंट्स की तलाश
एक ही नंबर से सेक्टर-18, सेक्टर-22, सेक्टर-23 और सेक्टर-40 में बैक-टू-बैक हुई इन वारदातों के बाद चंडीगढ़ पुलिस के आला अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय पुलिस के साथ-साथ साइबर क्राइम सेल को भी एक्टिव कर दिया गया है।
पुलिस अब मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर काम कर रही है:
- बैंक अकाउंट ट्रैकिंग: व्हाट्सएप पर भेजे गए QR कोड किस बैंक खाते या डिजिटल वॉलेट (जैसे Paytm/PhonePe) से लिंक हैं, उनका पता लगाया जा रहा है।
- कॉल डंप डेटा विश्लेषण: महाराष्ट्र के उस नंबर की लोकेशन और उसके कॉल रिकॉर्ड्स (CDR) खंगाले जा रहे हैं।
- गैंगस्टर कनेक्शन: क्या वाकई ‘दया गुजर ग्रुप’ नाम का कोई संगठित गिरोह सक्रिय है या यह किसी स्थानीय जालसाज का काम है, इसकी कड़ियों को जोड़ा जा रहा है।
इस घटना के बाद से शहर के डॉक्टर और क्लिनिक संचालकों में असुरक्षा का माहौल है। मेडिकल एसोसिएशन ने भी पुलिस से डॉक्टरों को तुरंत सुरक्षा मुहैया कराने और आरोपियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजने की मांग की है।
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