चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के उस फैसले को चुनौती देने वाली पंजाब सरकार की याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें हरियाणा को 8500 क्यूसेक अतिरिक्त पानी देने का आदेश दिया गया था।

पंजाब सरकार ने अदालत में दलील दी थी कि BBMB ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर यह निर्णय लिया और यह फैसला बिना राज्य की सहमति के लिया गया, जो समझौतों के खिलाफ है। राज्य का कहना था कि तकनीकी समिति की बैठक में “द्विपक्षीय सहमति” की शर्त थी, जिसे बाद में हटा दिया गया और एकतरफा निर्णय लागू कर दिया गया।


जानें पंजाब ने क्या तर्क दिया
पंजाब ने यह भी तर्क दिया कि पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के तहत BBMB का कार्य केवल प्रशासन, रखरखाव और संचालन तक सीमित है, जबकि पानी के बंटवारे जैसे निर्णय पूर्व समझौतों और सहमति के आधार पर ही हो सकते हैं।
राज्य सरकार ने 23 अप्रैल 2025 की तकनीकी समिति और 30 अप्रैल 2025 की बोर्ड बैठक के फैसलों को भी चुनौती दी थी। साथ ही यह आरोप लगाया गया कि हरियाणा को सीधे पानी मांगने (इंडेंट) की अनुमति देकर प्रक्रिया का उल्लंघन किया गया।


हाई कोर्ट ने क्या कहा ?
हालांकि हाई कोर्ट ने इन सभी दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि इस मामले पर पहले ही निर्णय दिया जा चुका है और जल वितरण जैसे तकनीकी व नीतिगत मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप सीमित होता है। ऐसे विवादों के लिए वैधानिक प्रक्रिया उपलब्ध है, जिसके तहत पक्षकारों को केंद्र सरकार के पास जाना चाहिए।


पंजाब केंद्र सरकार के समक्ष रख सकती है मामला
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित अवधि (मई-जून 2025) अब समाप्त हो चुकी है, इसलिए इस चरण पर हस्तक्षेप का औचित्य नहीं बचता। यदि पंजाब सरकार को अभी भी आपत्ति है, तो वह नियम 7 के तहत केंद्र सरकार के समक्ष अपना मामला रख सकती है।
इसके साथ ही अदालत ने अवमानना याचिका को भी निस्तारित कर दिया और कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में उसका कोई आधार नहीं बनता।