पुरुषोत्तम पात्र, गरियाबंद. गरियाबंद जिले में आदिवासी विकास विभाग के जरिए कराए गए कई सरकारी विकास कार्य अब जिला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं. स्कूल जतन योजना के करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं. स्कूलों में शौचालय निर्माण समय पर पूरा नहीं हो सका और स्वीकृत पदों से अधिक कर्मचारियों की नियुक्ति के कारण करोड़ों रुपये का वेतन बकाया हो गया है. जिला प्रशासन अब इन मामलों में जांच, वसूली और कार्रवाई की बात कर रहा है. कलेक्टर भगवान सिंह उइके ने स्वीकार किया है कि कई काम अधूरे हैं और संबंधित ठेकेदारों से राशि वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

केस-1 : स्कूल जतन योजना के 2.88 करोड़ के काम अधूरे

स्कूल जतन योजना के तहत जिले में कुल 830 स्कूलों के निर्माण एवं मरम्मत कार्य ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) को सौंपी गई थी, जिन्हें लगभग पूरा कर लिया गया. वहीं आदिवासी विकास विभाग को सौंपे गए 165 कार्यों में 50 से अधिक काम अब भी अधूरे हैं. इनमें 24 कार्य ऐसे हैं जिनके लिए महासमुंद की मेसर्स सुनील कंस्ट्रक्शन, कोरबा के अजय कुमार राठौर और जयनारायण यादव की फर्मों को अग्रिम भुगतान किया गया, लेकिन काम पूरा नहीं हुआ. इनसे करीब 2.88 करोड़ रुपये की वसूली की जानी है. विभाग ने 6 जुलाई को नोटिस जारी कर सात दिन के भीतर राशि लौटाने के निर्देश दिए हैं. भुगतान नहीं होने पर एफआईआर दर्ज कराने की कड़ी चेतावनी दी गई है. जिला पंचायत की शिक्षा समिति के तत्कालीन अध्यक्ष संजय नेताम का आरोप है कि स्थानीय ठेकेदारों को नजरअंदाज कर बाहरी एजेंसियों को मोटे कमीशन के आधार पर काम दिया गया, जिसका खामियाजा अब स्कूली बच्चों को भुगतना पड़ रहा है.

केस-2 : 61 लाख एडवांस, 10 महीने में केवल 23 शौचालय तैयार

जिले में 116 स्कूलों में शौचालय निर्माण के लिए करीब 1 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे. इस बार भी निर्माण एजेंसी के रूप में आदिवासी विकास विभाग ने दुर्ग की कंचन कंस्ट्रक्शन को काम सौंपते ही 61 लाख रुपये अग्रिम भुगतान कर दिया. पांचों विकासखंडों का काम एक ही एजेंसी को देने का विरोध हुआ था. इस काम के लिए स्थानीय एजेंसियों या पंचायतों को मौका नहीं दिया गया. मिली भगत के आरोप भी लगे, जो बाद में सच साबित हुए.  करीब 10 महीने बीत जाने के बाद भी केवल 23 शौचालयों का निर्माण पूरा हो पाया. इसके बाद अप्रैल में कलेक्टर ने शेष राशि में से 36 लाख रुपये की वसूली के लिए नोटिस जारी किया, लेकिन अब तक ठेका कंपनी ने भुगतान नहीं हुआ है.

जिला पंचायत निर्माण समिति के सभापति का आरोप है कि संबंधित ठेकेदार प्रभावशाली अधिकारियों के करीबी होने के कारण अब तक केवल नोटिस की औपचारिकता निभाई गई, जबकि प्रशासन चाहे तो कंपनी को ब्लैकलिस्ट भी कर सकता था.

केस-3 : स्वीकृत पदों से ज्यादा नियुक्तियां, 3.84 करोड़ का वेतन बकाया

आदिवासी विकास विभाग ने जिले की 79 आश्रम-शालाओं में स्वीकृत पदों से अधिक चपरासियों की मौखिक आदेशों पर नियुक्तियां कर दीं. कुछ मामलों में दलालों के माध्यम से पैसे लेकर भर्ती कराने और जनप्रतिनिधियों की सिफारिश पर नियुक्ति देने के आरोप भी लगे. स्थिति यह रही कि जहां केवल 255 पद स्वीकृत थे, वहां कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 513 तक पहुंच गई. शासन से केवल स्वीकृत पदों के अनुसार ही बजट मिलता रहा, जिसके चलते कर्मचारियों को रोटेशन के आधार पर वेतन दिया जाता रहा. भार बढ़ते गया तो दिसंबर 2025 में अतिरिक्त कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं. इसके बाद से प्रभावित कर्मचारी कई बार धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं. मार्च 2026 में लंबित वेतन के लिए भेजे गए मांग पत्र में 3.84 करोड़ रुपये की मांग की गई है. हाल ही में प्रस्तावित अनिश्चितकालीन आंदोलन भी प्रशासन के आश्वासन के बाद स्थगित किया गया. हालांकि सहायक आयुक्त लोकेश्वर पटेल का कहना है कि जब तक आबंटन नहीं मिलेगा भुगतान संभव नहीं है.

अब जो हो गया, सो हो गया : कलेक्टर भगवान सिंह उइके

आदिवासी विकास विभाग के अधिकांश काम अधूरे होने का सवाल पर कलेक्टर भगवान सिंह उइके ने स्वीकार करते हुए कहा कि हां, कई कार्य अधूरे हैं. उनका भौतिक सत्यापन कराया गया है. संबंधित ठेकेदारों को अंतर की राशि जमा करने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं. दूसरे जिलों में आरआरसी प्रकरण दर्ज कर संपत्ति कुर्क कर वसूली की जाएगी.

बिना कलेक्टर की मंजूरी के काम आवंटित नहीं होते, फिर जिम्मेदारी किसकी है? इस सवाल पर कलेक्टर उइके का कहना है कि “कुछ कार्य मेरे कार्यकाल से पहले के हैं और कुछ मेरे कार्यकाल के दौरान हुए. तात्कालीन सहायक आयुक्त नवीन भगत के चलते ये सभी गड़बड़ियां हुई है. पूरे मामले की जांच कर शासन को रिपोर्ट भेजी जा रही है.

क्या फैसले लेने में दूरदर्शिता की कमी रही? कलेक्टर ने जवाब देते हुए कहा कि अब जो हो गया, सो हो गया. हमारी कोशिश है कि सभी गड़बड़ियों को ठीक किया जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो.

Lalluram.Com के व्हाट्सएप चैनल को Follow करना न भूलें.
https://whatsapp.com/channel/0029Va9ikmL6RGJ8hkYEFC2H