कुंदन कुमार, पटना। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने आरक्षण के मुद्दे पर तीखा रुख अख्तियार करते हुए स्पष्ट किया है कि भारतीय संविधान में आर्थिक आधार पर आरक्षण देने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि आरक्षण की व्यवस्था समाज के उन वर्गों के लिए बनाई गई थी जो सदियों से सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े और प्रताड़ित रहे हैं। इसे किसी भी स्थिति में आर्थिक स्थिति के आधार पर तय नहीं किया जा सकता है।
जीतन राम मांझी के बयान पर पलटवार
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी द्वारा क्रीमी लेयर की वकालत करने वाले बयानों पर चिराग पासवान ने जोरदार निशाना साधा। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि मांझी जी क्रीमी लेयर और आरक्षण में बदलाव को लेकर इतने ही मुखर हैं, तो उन्हें सबसे पहले अपने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देना चाहिए। इसके बाद उन्हें संसद के पटल पर आकर इस विषय पर खुली चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने यह भी तंज कसा कि जब जीतन राम मांझी मुख्यमंत्री थे, तब उनके मंदिर जाने के बाद मंदिर को धोए जाने की घटना को उन्हें नहीं भूलना चाहिए। ऐसे अतीत को याद रखते हुए इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर बयानबाजी करना किसी भी नेता के लिए शोभा नहीं देता।
आरक्षण कोई खैरात नहीं, पिछड़ों का अधिकार
चिराग पासवान ने जोर देकर कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने आरक्षण की व्यवस्था समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए की थी। यह किसी तरह की खैरात या दान नहीं है, बल्कि समानता और न्याय स्थापित करने का संवैधानिक साधन है। चुनाव के समय राजनीतिक नफे-नुकसान के लिए आरक्षण के स्वरूप को बदलने की बातें की जाती हैं, जो कि पूरी तरह अनुचित हैं। उन्होंने दोहराया कि उनकी पार्टी हमेशा से इस बात के पक्ष में रही है कि आरक्षण से जुड़े मूल प्रावधानों से कोई छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए और इस पर अनावश्यक बयानबाजी से नेताओं को बचना चाहिए।


