चंडीगढ़ | हरियाणा में निकाय कर्मचारियों और सरकार के बीच चल रहा गतिरोध अब आर-पार की लड़ाई में बदल गया है। शहरी निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव अशोक मीणा और नगर पालिका कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक बेनतीजा रही। इसके कारण प्रदेश के करीब 30 हजार सफाई कर्मचारियों ने आज से पूर्ण हड़ताल पर जाने का एलान कर दिया है।

प्रमुख मांगें: ठेका प्रथा खत्म हो और 30 हजार न्यूनतम वेतन मिले

संघ के नेताओं ने बैठक में दो टूक कहा कि जब तक सरकार सफाई और सीवर कार्य में व्याप्त भेदभाव’को समाप्त नहीं करती, तब तक आंदोलन थमेगा नहीं। उनकी मांगे हैं कि, सफाई और सीवर के काम से ठेका प्रथा को पूरी तरह से समाप्त किया जाए। ठेके पर लगे कर्मचारियों को सीधे विभाग के रोल (Departmental Roll) पर लिया जाए। सभी कर्मचारियों के लिए 30,000 रुपये न्यूनतम वेतन का आधिकारिक पत्र जारी हो।

सरकार का सख्त रुख: नो वर्क, नो पे लागू

वार्ता विफल होने के तत्काल बाद सरकार अलर्ट मोड पर आ गई है। शहरी निकाय विभाग ने एक आधिकारिक पत्र जारी कर स्पष्ट किया है कि हड़ताल में शामिल होने वाले कर्मचारियों का वेतन काटा जाएगा। हालांकि, बैठक के दौरान आयुक्त अशोक मीणा ने सफाई अभियान की संवेदनशीलता का हवाला देते हुए हड़ताल न करने की अपील की थी, लेकिन कर्मचारी संघ ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।

दमकल केंद्रों पर भूख हड़ताल, आंदोलन में शामिल हुए फायर कर्मी

निकाय कर्मचारियों के समर्थन में अब प्रदेश के फायर कर्मी भी उतर आए हैं। दमकल केंद्रों पर 5 दिवसीय क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर दी गई है। फायर कर्मियों का आरोप है कि सरकार उनकी लंबित मांगों को अनसुना कर रही है और आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। इसी के विरोध में फायर कर्मियों ने भी 1 मई से दो दिवसीय हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है।

2 मई तक का अल्टीमेटम: बढ़ सकती है मुश्किल

नगर पालिका कर्मचारी संघ के राज्य प्रधान नरेश कुमार शास्त्री ने सरकार को सीधी चेतावनी दी है। यदि सरकार ने 2 मई तक मांगों का ठोस समाधान नहीं निकाला, तो संघ इस हड़ताल को अनिश्चितकाल के लिए आगे बढ़ाने का फैसला लेगा। दमनकारी नीतियों से आंदोलन को दबाया नहीं जा सकता।