भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सीबीएलयू भिवानी के दीक्षांत समारोह में शिरकत की और स्पष्ट किया कि जजमेंट में एआई का उपयोग नहीं होता। समारोह में राज्यपाल असीम कुमार घोष और शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा भी मौजूद रहे।
अजय सैनी, भिवानी। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत शनिवार को भिवानी स्थित चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय (CBLU) के 5वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस गरिमामय समारोह में उनके साथ हरियाणा के राज्यपाल महामहिम असीम कुमार घोष और शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। प्रेमनगर स्थित विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस समारोह के दौरान सीजेआई और राज्यपाल ने लगभग 500 छात्र-छात्राओं को डिग्रियां प्रदान कीं। इस शैक्षणिक उत्सव में 43 मेधावी छात्रों को गोल्ड मेडल और 12 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि से नवाजा गया।
न्यायपालिका में AI की भूमिका और ‘जज का विवेक’
समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और न्यायपालिका के अंतर्संबंधों पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यद्यपि एआई अन्य प्रशासनिक न्यायिक प्रणालियों में एक उपयोगी टूल (उपकरण) हो सकता है, लेकिन न्यायाधीश अपना फैसला (जजमेंट) सुनाते समय इसका प्रयोग नहीं करते हैं। सीजेआई ने जोर देकर कहा कि फैसला सुनाना न्यायाधीश का अपना विवेक होता है, जिसे तकनीक प्रतिस्थापित नहीं कर सकती। उन्होंने एआई के सकारात्मक बिंदुओं को स्वीकार करते हुए इसके नकारात्मक पक्षों पर चिंता जताई और बताया कि इससे निपटने के लिए जरूरी प्रिवेंटिव स्टेप्स (निवारक कदम) उठाए जा रहे हैं।
लंबित केसों पर सुधार और ग्रामीण छात्रों को सफलता का मंत्र
अदालतों में केसों की बड़ी संख्या में पेंडेंसी को लेकर पूछे गए सवाल पर सीजेआई ने सकारात्मक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अब अदालतों में लंबित मामलों की वैसी स्थिति नहीं है जैसी पहले थी, और आने वाले समय में इस दिशा में और भी बड़े सुधार देखने को मिलेंगे। ग्रामीण परिवेश से आने वाले छात्रों का उत्साहवर्धन करते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि ग्रामीण पृष्ठभूमि के युवाओं के लिए सफलता के मापदंड अधिक चुनौतीपूर्ण होते हैं। उन्हें अधिक मेहनत, निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करने की आवश्यकता है ताकि वे बेहतर परिणाम प्राप्त कर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे सकें।

