प्रदीप मालवीय, उज्जैन। बुधवार शाम प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने 946 करोड़ से अधिक के एलिवेटेड ब्रिज का भूमिपूजन किया। यह एलिवेटेड ब्रिज साढ़े 5 किलोमीटर लंबा बनाया जाएगा। इसके बनने से शहर में ट्रैफिक व्यवस्था के साथ महाकाल मंदिर के साथ काल भैरव, मंगलनाथ और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचने वाले मार्गों पर यातायात का दबाव कम करने में यह परियोजना मदद करेगी। जिस तरह से उज्जैन में पूरे साल श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। सिंहस्थ के दौरान यह संख्या और बढ़ेगी। ऐसे में पुराने शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर करने के लिए एलिवेटेड कॉरिडोर महत्वपूर्ण है। इस दौरान सीएम डॉ मोहन यादव ने आपदा प्रबंधन, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था की तैयारियों का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने कालिदास अकादमी में होमगार्ड और एसडीआरएफ की आपदा प्रबंधन प्रदर्शनी देखी और बाढ़, आगजनी, भवन हादसे व सड़क दुर्घटनाओं में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक रेस्क्यू उपकरणों की जानकारी ली।

सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार शाम हेलीकॉप्टर से पुलिस लाइन स्थित हेलीपैड पहुंचे। जहां जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद वे कालिदास अकादमी पहुंचे। यहां 945.20 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले 5.30 किमी लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर का भूमिपूजन किया और होमगार्ड-एसडीआरएफ की ओर से आपदा प्रबंधन से जुड़े आधुनिक उपकरणों की प्रदर्शनी को देखी, उनसे चर्चा की। इस दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि बाढ़, आगजनी, भवन दुर्घटना, सड़क हादसे और अन्य आपात स्थितियों में इन उपकरणों की मदद से राहत और बचाव कार्य तेजी से किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने उपकरणों की कार्यप्रणाली और आपदा के दौरान उनके इस्तेमाल की जानकारी ली।

होमगार्ड की ट्रेनिंग का भी शुभारंभ

मुख्यमंत्री ने होमगार्ड की ट्रेनिंग का भी शुभारंभ किया। उन्होंने अधिकारियों और जवानों की तैयारियों की सराहना करते हुए कहा कि सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजन में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया और प्रभावी बचाव व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने आपदा मित्रों को भी व्यवस्था से जोड़ने और पुलिस बल के साथ होमगार्ड जवानों को लगातार प्रशिक्षित व सतर्क रखने पर जोर दिया।

धार्मिक स्थलों तक कनेक्टिविटी बेहतर होगी- CM डॉ मोहन

सीएम डॉ मोहन यादव ने बताया कि 945 करोड़ रुपए से अधिक राशि की लागत से 5.30 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा। बढ़ती श्रद्धालु संख्या के अनुरूप शहर की आधारभूत सुविधाओं को भी लगातार विकसित करना जरूरी है। पुराने शहर और धार्मिक स्थलों तक कनेक्टिविटी बेहतर होगी, इसके दो प्रमुख हिस्से होंगे। पहला इंद्रानगर चौराहे से नीलगंगा चौराहे तक और दूसरा निकास चौराहे से इंदौर गेट तक होगा। इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार आवश्यक अनुमतियों की प्रक्रिया को गति देने का प्रयास करेगी, ताकि उज्जैन में सुविधाओं का विस्तार तेजी से हो और यातायात व्यवस्था भी व्यवस्थित बनी रहे।

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