हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सिंचाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नया मास्टरप्लान पेश किया है। इसके तहत किसानों को सामूहिक टैंक और माइक्रो इरिगेशन पर 85 प्रतिशत तक की भारी सब्सिडी दी जाएगी।
कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा में खेती की तस्वीर बदलने की तैयारी शुरू हो गई है। अगर सरकार की नई योजना जमीन पर उतरी, तो आने वाले समय में किसानों को सिंचाई के लिए महंगे ट्यूबवेल लगाने और बिजली-पानी की किल्लत से काफी हद तक राहत मिल सकती है। मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini ने शनिवार को हरियाणा विजन-2047 के तहत सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की समीक्षा बैठक में “हर खेत तक पानी” पहुंचाने के लिए बड़ा मास्टरप्लान पेश किया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों के समूह बनाकर कम से कम 10 एकड़ या उससे अधिक भूमि के लिए सामूहिक टैंक बनवाए जाएं, जिन्हें नहरी पानी से भरा जाएगा और फिर माइक्रो इरिगेशन (सूक्ष्म सिंचाई) के जरिए खेतों तक पानी पहुंचाया जाएगा।
सरकार की इस योजना का सबसे बड़ा आकर्षण 85 प्रतिशत सब्सिडी है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि सामूहिक टैंक बनाने पर सरकार किसानों को भारी सब्सिडी देगी, जबकि इन टैंकों पर सोलर पैनल भी लगाए जाएंगे ताकि टपका सिंचाई और फव्वारा प्रणाली के जरिए कम पानी में ज्यादा खेतों की सिंचाई हो सके।
मुख्यमंत्री का दावा है कि योजना लागू होने के बाद किसानों को ट्यूबवेल लगाने की जरूरत कम पड़ जाएगी और बिजली-पानी की समस्या से भी राहत मिलेगी। सरकार चाहती है कि खेतों में खुले पानी से सिंचाई की पारंपरिक व्यवस्था कम हो और “पर ड्रॉप-मोर क्रॉप” मॉडल अपनाया जाए।
शुरुआत में सरकार ने 9 जिलों—भिवानी, चरखी दादरी, गुरुग्राम, महेंद्रगढ़, नूंह, रेवाड़ी, हिसार, झज्जर और सिरसा—को इस योजना के लिए चुना है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि इन जिलों में गांव स्तर पर कृषि भूमि को माइक्रो इरिगेशन से जोड़ने के लिए तेजी से काम किया जाए। साथ ही इस साल से गन्ना और कपास जैसी फसलों में भी माइक्रो इरिगेशन को बढ़ावा देने की तैयारी है। सरकार इजराइल जैसे देशों की आधुनिक तकनीक का अध्ययन कर हरियाणा में सिंचाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में भी काम करेगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को नहरों की मरम्मत, पानी की बर्बादी रोकने और किसानों को जागरूक करने के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही प्रदेश की आईटीआई में माइक्रो इरिगेशन आधारित नई ट्रेड शुरू करने की बात कही गई है, ताकि इस क्षेत्र में कुशल युवा तैयार हो सकें। अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार का यह “हर खेत तक पानी” मास्टरप्लान किसानों के लिए कितना कारगर साबित होता है और क्या वाकई आने वाले वर्षों में ट्यूबवेल पर निर्भरता कम हो पाएगी।

