पुरुषोत्तम पात्र, गरियाबंद. सुपेबेड़ा सामूहिक जलप्रदाय योजना के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा मंजूर 7 करोड़ रुपये का एनीकट एक मजबूत सपोर्ट सिस्टम का काम करेगा. एनीकट के निर्माण से सालभर जल उपलब्धता सुनिश्चित होगी और गर्मी के दिनों में भी योजना को तेल नदी से पर्याप्त पानी मिलता रहेगा. इससे न केवल पेयजल आपूर्ति की चिंता दूर होगी, बल्कि क्षेत्र में वाटर लेवल बढ़ने और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार का भी लाभ मिलेगा.
एनीकट बनने के बाद जलप्रदाय योजना के इंटेक वेल के आसपास सालभर नमी और जलभराव बना रहेगा. इससे नदी में जल उपलब्धता को लेकर बनी रहने वाली चिंता समाप्त हो जाएगी. सिंचाई विभाग द्वारा प्रस्तावित इस एनीकट के निर्माण से न केवल जलप्रदाय योजना को मजबूती मिलेगी, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भूजल स्तर भी रिचार्ज होगा. इसके अलावा कृषि और उद्यानिकी कार्यों के लिए सालभर एक निर्धारित रकबे में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी.

जिला पंचायत अध्यक्ष गौरी शंकर कश्यप और प्रभावित क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य देशबंधु नायक ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि देवभोग क्षेत्र के लिए यह योजना किसी संजीवनी से कम नहीं है. दोनों जनप्रतिनिधियों ने क्षेत्रवासियों की ओर से मुख्यमंत्री का धन्यवाद ज्ञापित किया.
जानिए क्या है सुपेबेड़ा सामूहिक जलप्रदाय योजना
विगत सात वर्षों से सुपेबेड़ा सामूहिक जलप्रदाय योजना पर काम चल रहा था. आखिरकार वर्ष 2024 में जल जीवन मिशन के तहत 8 करोड़ रुपये की इस योजना को मंजूरी मिली. योजना के तहत तेल नदी के पानी को सुपेबेड़ा में स्थापित किए जा रहे ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाकर 9 गांवों के 2074 परिवारों को प्रतिदिन 55 लीटर पेयजल उपलब्ध कराया जाना है.
इसके लिए तेल नदी के तट पर 21 मीटर ऊंचा इंटेक वेल बनाया जा रहा है. यह संरचना सतही जल के साथ-साथ 9 मीटर गहराई तक उपलब्ध नदी के पानी को भी ग्रहण कर सकेगी. इसके बाद हाई पावर पंप के माध्यम से पानी को ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाया जाएगा, जहां शुद्धिकरण के बाद 75 केएल क्षमता वाले ओवरहेड टैंक में संग्रहित किया जाएगा. वहां से पाइपलाइन के जरिए गांवों तक पेयजल की आपूर्ति होगी. विभाग के अनुसार योजना का लगभग 85 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और इस वर्ष के अंत तक जल आपूर्ति शुरू होने की संभावना है.
एनिकट बनाएगा सपोर्ट सिस्टम

अधिकारियों के अनुसार जलप्रदाय योजना का डिजाइन तेल नदी की प्रकृति और सिंचाई विभाग के सर्वे रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया था. हालांकि धरातल पर काम शुरू होने के बाद यह सामने आया कि लगभग छह माह तक बहने वाली तेल नदी में दो माह तक ही पर्याप्त अंडरग्राउंड वाटर रहता है, जबकि शेष चार माह नदी का अधिकांश हिस्सा सूखी रेत में तब्दील हो जाता है. ऐसे में सालभर तेल नदी के सहारे इस महत्वपूर्ण जलप्रदाय योजना से पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया था. इंटेक वेल के आसपास लगातार जलभराव बनाए रखने की आवश्यकता महसूस हुई. करीब दो वर्ष पहले 2 करोड़ रुपये की लागत से एक वॉल का निर्माण किया गया था, लेकिन वह अपेक्षित परिणाम नहीं दे सका. इसके बाद सिंचाई विभाग ने स्थायी समाधान के रूप में एनीकट निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया.
300 मीटर लंबा और 3 मीटर ऊंचा होगा एनीकट
ईई सिंचाई गरियाबंद एस.के. बर्मन ने बताया कि प्रस्तावित एनीकट लगभग 300 मीटर लंबा और अधिकतम 3 मीटर ऊंचा होगा. इसका निर्माण डायफ्राम वॉल तकनीक से किया जाएगा. इससे क्षेत्र का वाटर लेवल रिचार्ज होगा और भविष्य में रबी व खरीफ सीजन के दौरान कृषि एवं उद्यानिकी गतिविधियों के लिए किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी.
वहीं ईई पीएचई गरियाबंद विप्लव ध्रीतलहरे ने कहा कि एनीकट बनने के बाद जल आपूर्ति बाधित होने की आशंका नहीं रहेगी. साथ ही भविष्य में अन्य प्रभावित गांवों तक भी जलप्रदाय योजना के विस्तार में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

