मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंचकूला में गुरु अर्जन देव को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने घोषणा की कि स्कूली पाठ्यक्रम में सिख गुरुओं का गौरवशाली इतिहास शामिल किया जाएगा।
पंचकूला। जिले में श्री गुरु अर्जन देव के 420वें शहीदी दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शिरकत की। मुख्यमंत्री ने गुरु साहिब के बलिदान को सत्य, धर्म और मानवता का अद्वितीय उदाहरण बताते हुए कहा कि उनकी शहादत अन्याय के विरुद्ध झुकने से इनकार करने की प्रेरणा देती है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने छबील सेवा की और गुरु साहिब के जीवन पर आधारित डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन भी देखा। कार्यक्रम में हरियाणा और पंजाब के कई संत-महापुरुषों ने हिस्सा लिया, जहाँ उन्होंने गुरुओं की गौरवशाली परंपरा और त्याग को याद किया। यह आयोजन राज्य सरकार की ‘संत महापुरुष सम्मान एवं विचार प्रसार योजना’ के तहत किया गया।

सिख इतिहास अब पाठ्यक्रम का हिस्सा
मुख्यमंत्री सैनी ने घोषणा की कि हरियाणा सरकार सिख गुरुओं के योगदान को भावी पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। अब कक्षा आठवीं के इतिहास पाठ्यक्रम में सिख गुरुओं के प्रेरक इतिहास को शामिल किया गया है। इसके जरिए विद्यार्थी न केवल गुरुओं के त्याग और बलिदान को पढ़ेंगे, बल्कि बाबा बंदा सिंह बहादुर के आदर्शों से भी परिचित होंगे। सरकार का मानना है कि अपनी विरासत और इतिहास को जानकर ही युवा राष्ट्र निर्माण में अपना प्रभावी योगदान दे सकते हैं। इस पहल का उद्देश्य युवाओं में आत्मविश्वास और सांस्कृतिक गौरव की भावना को जाग्रत करना है ताकि वे देश की महान परंपराओं को आगे बढ़ा सकें।

गुरुओं की शिक्षा और जनकल्याण कार्य
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सिख गुरुओं के बलिदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिया जा रहा है। सरकार ने सिरसा के ऐतिहासिक गुरुद्वारा चिल्ला साहिब की नौ एकड़ भूमि बिना किसी शुल्क के स्थानांतरित की है और कई संस्थानों का नाम गुरुओं के सम्मान में रखा है। इसके अतिरिक्त, 1984 दंगा प्रभावित परिवारों के सदस्यों को सरकारी नौकरी देने का निर्णय भी लिया गया है। मुख्यमंत्री ने लंगर परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि सेवा, करुणा और समानता ही सच्चा धर्म है। सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र के साथ समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुँचाने का निरंतर कार्य कर रही है।

