रोहित कश्यप, प्रतीक शर्मा, मुंगेली। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में वन अधिकार पत्रों में कथित अनियमितताओं और फर्जीवाड़े से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कलेक्टर कुन्दन कुमार ने अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 के तहत जारी वन अधिकार पत्रों से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के लिए जिला स्तरीय जांच समिति का गठन किया है।
शिकायतों की होगी जांच
जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, समिति वन अधिकार पत्रों में फर्जीवाड़ा, बिना कब्जे के पट्टा प्राप्त करने, अपात्र व्यक्तियों को वन अधिकार पत्र जारी किए जाने और अन्य प्रकार की अनियमितताओं से संबंधित शिकायतों की विस्तृत जांच करेगी। जांच के दौरान दस्तावेजों की सत्यता, पात्रता, स्थल निरीक्षण सहित सभी संबंधित बिंदुओं की पड़ताल की जाएगी।
जानिए जांच टीम में कौन है शामिल
कलेक्टर द्वारा गठित जांच समिति में अपर कलेक्टर जी.एल. यादव को अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) लोरमी अजीत पुजारी, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास शिव कुमार बांधे, अनुविभागीय अधिकारी (वन) लोरमी दशांश सूर्यवंशी, सहायक संचालक अचानकमार टाइगर रिजर्व समीर जोनाथन, जनपद पंचायत लोरमी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुरेश कुमार कंवर और वन परिक्षेत्र अधिकारी खुड़िया अनिरुद्ध कश्यप को सदस्य नियुक्त किया गया है।
सात दिनों के अंदर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश
प्रशासन के अनुसार, समिति को प्राप्त शिकायतों की गहन जांच कर वास्तविक स्थिति का पता लगाने के निर्देश दिए गए हैं। वन अधिकार पत्रों के संबंध में लगाए गए आरोपों की जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि संबंधित हितग्राही वास्तव में अधिनियम के तहत पात्र हैं या नहीं, भूमि पर उनका वास्तविक कब्जा है या नहीं तथा जारी किए गए दस्तावेज नियमों के अनुरूप हैं अथवा नहीं।
कलेक्टर ने समिति को निर्देश दिए हैं कि वह सभी शिकायतों की विस्तृत जांच कर सात दिवस के भीतर अपना अभिमत सहित प्रतिवेदन प्रस्तुत करे। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
शिकायतों के बाद प्रशासन ने उठाया कदम
गौरतलब है कि जिले के वनांचल क्षेत्रों में कुछ ग्रामीणों द्वारा वन अधिकार पत्र दिलाने के नाम पर कथित अनियमितताओं और धोखाधड़ी की शिकायतें सामने आई थीं। ग्रामीणों ने कुछ लोगों पर वन अधिकार पट्टा दिलाने का झांसा देकर राशि लेने और कथित दस्तावेज उपलब्ध कराने के आरोप लगाए थे। शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच समिति गठित कर दी है।
प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी शासकीय योजना या अधिकार पत्र के नाम पर बिचौलियों के झांसे में न आएं तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल संबंधित विभाग या प्रशासन को दें।
जिला प्रशासन का कहना है कि जांच में यदि किसी प्रकार की अनियमितता या फर्जीवाड़ा सामने आता है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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