दिल्ली में ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने और प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव कम करने के लिए रेखा गुप्ता सरकार (Rekha Gupta Government) कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। इसी कड़ी में नजफगढ़ नाले (Najafgarh Drain) के साथ करीब 61 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की योजना है। इसके लिए दिल्ली सरकार एक निजी कंसल्टेंट को नियुक्त करने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर (Elevated Corridor) वजीराबाद को उत्तरी दिल्ली के विभिन्न हिस्सों से जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकता है। परियोजना के पूरा होने के बाद प्रमुख सड़कों पर यातायात का दबाव कम करने और लोगों को वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
दिल्ली सरकार ने इस साल फरवरी में नजफगढ़ नाले के साथ एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की योजना का ऐलान किया था। अब इस परियोजना को जमीन पर उतारने की दिशा में एक और कदम बढ़ाया गया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) जल्द एक निजी कंसल्टेंट को नियुक्त करने की तैयारी कर रहा है। कंसल्टेंट की मदद से प्रस्तावित कॉरिडोर की फिजिबिलिटी स्टडी कराई जाएगी। इसमें परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता, संभावित रूट और निर्माण से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा। अध्ययन के आधार पर विस्तृत प्रोजेक्ट प्लान तैयार किया जाएगा। फिजिबिलिटी स्टडी पूरी होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि करीब 61 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर को किस तरह विकसित किया जा सकता है। इसके बाद परियोजना की लागत, डिजाइन और निर्माण से जुड़े अन्य पहलुओं पर आगे निर्णय लिया जाएगा।
पीक आवर्स में धीमी रफ्तार और क्रॉस मूवमेंट से बढ़ता है ट्रैफिक दबाव
पीडब्ल्यूडी के एक अधिकारी के मुताबिक, नजफगढ़ नाले के आसपास के मार्ग पर पीक और नॉन-पीक दोनों समय वाहनों की धीमी गति और क्रॉस मूवमेंट के कारण ट्रैफिक का दबाव काफी अधिक रहता है। यही वजह है कि परियोजना को शुरू करने से पहले इसकी व्यवहार्यता का विस्तृत अध्ययन कराने का फैसला किया गया है। अधिकारी ने बताया कि पीडब्ल्यूडी इस काम के लिए एक कंसल्टेंट नियुक्त करने की योजना बना रहा है। कंसल्टेंट की ओर से फिजिबिलिटी स्टडी किए जाने के बाद परियोजना के आगे के स्वरूप और निर्माण योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा।
नाले के दोनों किनारों पर बनेगी सड़क
प्रस्तावित योजना के मुताबिक, छावला से बसई दारापुर तक नजफगढ़ नाले के दोनों किनारों पर 27.415 किलोमीटर लंबी सड़क विकसित की जाएगी। दोनों किनारों की सड़क को मिलाकर इसकी कुल लंबाई 54.83 किलोमीटर होगी। इसके अलावा झटीकरा ब्रिज से छावला ब्रिज तक नाले के बाएं किनारे पर 5.94 किलोमीटर लंबी दो-लेन सड़क बनाने का प्रस्ताव है। इन सड़कों के विकास का उद्देश्य नाले के आसपास बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने और मौजूदा सड़क नेटवर्क पर यातायात का दबाव कम करना है।
ट्रैफिक दबाव से लेकर ईंधन खपत और प्रदूषण तक कम करने का लक्ष्य
पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के मुताबिक, प्रस्तावित कॉरिडोर का सबसे बड़ा उद्देश्य सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव, लोगों का यात्रा समय, ईंधन की खपत और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना है। करीब 454 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस कॉरिडोर से दिल्ली की कई प्रमुख सड़कों को आपस में जोड़ने की योजना है। प्रस्तावित मार्ग को आउटर रिंग रोड, इनर रिंग रोड, शिवाजी मार्ग, पंखा रोड, यूईआर-II, नजफगढ़ रोड और अन्य प्रमुख सड़कों से कनेक्ट करने की योजना है। यूईआर-II के जरिए एनएच-9 और रोहतक रोड की ओर भी कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।
61 KM लंबी सड़क के साथ पैदल और साइकिल ट्रैक
नजफगढ़ नाले के किनारे करीब 61 किलोमीटर लंबी और 7 मीटर चौड़ी पक्की सड़क विकसित करने की योजना है। इसके साथ ही पैदल चलने वालों, दौड़ने और साइकिल चलाने वालों के लिए अलग ट्रैक बनाए जाएंगे। सड़क के किनारे पेड़-पौधे लगाकर हरियाली विकसित की जाएगी। इससे कॉरिडोर को केवल यातायात के वैकल्पिक मार्ग के तौर पर नहीं, बल्कि लोगों के लिए बेहतर और सुविधाजनक सार्वजनिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने की कोशिश होगी।
मेट्रो डिपो के पास बनेगा नया पुल
आवाजाही को बेहतर बनाने के लिए मेट्रो डिपो के पास एक नया पुल बनाने का भी प्रस्ताव है। इससे कॉरिडोर से जुड़ने वाले क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करने में मदद मिल सकती है। प्रोजेक्ट प्लान में सड़क कॉरिडोर के आसपास लैंडस्केपिंग और बड़े पैमाने पर पौधरोपण करने का भी प्रावधान है। जहां जरूरत होगी, वहां नई बाउंड्री बनाई जाएगी। वहीं, मौजूदा टूटी-फूटी दीवारों की मरम्मत कर उन्हें व्यवस्थित किया जाएगा।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m


