सोनीपत। देश में डिजिटल और कैशलेस भुगतान को बढ़ावा देने के बीच पेट्रोल पंप संचालकों ने यूपीआई लेनदेन पर लगने वाले MDR को लेकर आपत्ति जताई है। सोनीपत पेट्रोल पंप एसोसिएशन का कहना है कि 2 हजार रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर MDR का अतिरिक्त खर्च पहले से सीमित मार्जिन पर काम कर रहे संचालकों की परेशानी बढ़ा सकता है।
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि अगर इस अतिरिक्त शुल्क से राहत नहीं मिली तो आने वाले समय में प्रदेशभर के पेट्रोल पंपों पर कैशलेस भुगतान की सुविधा बंद करने पर विचार किया जा सकता है।
10 साल से कमीशन में नहीं हुआ बदलाव
सोनीपत पेट्रोल पंप एसोसिएशन के प्रधान परविंदर खत्री के अनुसार, पेट्रोल पंप संचालकों के कमीशन में पिछले करीब 10 वर्षों से कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि फिलहाल पेट्रोल पर करीब 3 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 2 रुपये प्रति लीटर कमीशन मिलता है।
उनका कहना है कि इस दौरान महंगाई के साथ-साथ पेट्रोल पंप संचालन से जुड़े खर्च में लगातार वृद्धि हुई है, लेकिन कमीशन में उसी अनुपात में बदलाव नहीं हुआ।
बिजली से लेकर कर्मचारियों के वेतन तक बढ़ा खर्च
पेट्रोल पंप संचालकों के मुताबिक, बिजली के बिल, कर्मचारियों का वेतन, मशीनों का रखरखाव और अन्य संचालन खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में यूपीआई भुगतान पर MDR का अतिरिक्त खर्च उनके लिए आर्थिक दबाव और बढ़ा सकता है।
एसोसिएशन का कहना है कि सीमित कमीशन के बीच डिजिटल भुगतान से जुड़े अतिरिक्त खर्च को लंबे समय तक वहन करना उनके लिए मुश्किल होगा।
MDR से राहत नहीं मिली तो कैशलेस भुगतान पर रोक का संकेत
परविंदर खत्री ने कहा कि पेट्रोल पंप संचालक अतिरिक्त MDR खर्च उठाने की स्थिति में नहीं हैं। यदि इस मामले में राहत नहीं दी गई तो प्रदेश स्तर पर पेट्रोल पंपों में कैशलेस भुगतान लेना बंद करने का फैसला भी लिया जा सकता है।
हालांकि, सोनीपत पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने फिलहाल अपने स्तर पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। संगठन प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के पेट्रोल पंप संगठनों के अगले निर्देशों का इंतजार कर रहा है।
प्रदेश और राष्ट्रीय संगठन से लगातार संपर्क
एसोसिएशन पदाधिकारियों के मुताबिक, इस मुद्दे को लेकर प्रदेश स्तरीय संगठन और राष्ट्रीय पेट्रोल पंप संगठन के साथ लगातार बातचीत चल रही है। आगे सामूहिक स्तर पर क्या निर्णय लिया जाए, यह उच्च स्तर के निर्देशों के बाद तय किया जाएगा।
डिजिटल भुगतान पर पड़ सकता है असर
एक तरफ सरकार डिजिटल इंडिया और कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे रही है और पेट्रोल पंपों पर बड़ी संख्या में ग्राहक UPI के जरिए भुगतान कर रहे हैं। दूसरी ओर, MDR के खर्च को लेकर पेट्रोल पंप संचालक राहत की मांग कर रहे हैं।
अब यह देखना होगा कि MDR को लेकर सरकार और पेट्रोल पंप संगठनों के बीच किस तरह का समाधान निकलता है। यदि मामला नहीं सुलझा, तो इसका असर पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध डिजिटल और कैशलेस भुगतान व्यवस्था पर पड़ सकता है।
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