राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर उपजा विवाद और असमंजस अब चरम पर पहुंच गया है। एक ओर जहां मप्र कर्मचारी चयन मंडल (MP ESB) ने परीक्षा का टाइमटेबल घोषित कर दिया है, वहीं दूसरी ओर स्कूल शिक्षा विभाग की चुप्पी से सेवारत शिक्षकों के बीच असमंजस बना हुआ है। इस बीच, कांग्रेस के तीखे हमलों के बाद अब सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है।

21 अगस्त से फॉर्म, 12 अक्टूबर को परीक्षा

कर्मचारी चयन मंडल द्वारा घोषित समय-सारणी के अनुसार- ऑनलाइन आवेदन की शुरुआत: 21 अगस्त, आवेदन की अंतिम तिथि: 4 सितंबर, परीक्षा की तिथि: 12 अक्टूबर। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत 2009 तक नियुक्त सभी सेवारत शिक्षकों के लिए 3 वर्ष के भीतर TET पास करना अनिवार्य किया गया है। हालांकि, जिनकी सेवानिवृत्ति में 5 वर्ष से कम समय बचा है, उन्हें इस परीक्षा से छूट दी गई है।

दावों की हवा निकली, कोर्ट में याचिका नहीं

स्कूल शिक्षा विभाग ने 2006 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों को परीक्षा से राहत दिलाने और सुप्रीम कोर्ट जाने की बातें ‘ऑफ द रिकॉर्ड’ कही थीं, लेकिन अब तक ऐसी किसी याचिका के दायर होने की सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आई है। वहीं, मप्र शिक्षक संघ ने परीक्षा कराने वाले अदालती फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की है, जिस पर सुनवाई होना अभी बाकी है।

30 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन

TET की अनिवार्यता के विरोध में देशभर के शिक्षकों का असंतोष फूट पड़ा है। ज्वाइंट टीचर्स फ्रंट के बैनर तले 18 राज्यों के लाखों शिक्षक 30 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा आंदोलन करने जा रहे हैं। इस प्रदर्शन में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, मेघालय और त्रिपुरा के शिक्षक हिस्सा लेंगे।  

20-22 साल से पढ़ा रहे शिक्षकों के सम्मान में अध्यादेश लाए सरकार

मामले को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता स्वदेश शर्मा ने भाजपा सरकार पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा: “मध्य प्रदेश में 25 साल और केंद्र में 12 साल से भाजपा की सरकार है। इस सरकार में उन अनुभवी शिक्षकों को TET देने पर मजबूर किया जा रहा है, जिनके पढ़ाए हुए बच्चे आज UPSC पास कर बड़े पदों पर सेवाएं दे रहे हैं। जो शिक्षक 20-22 सालों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, क्या भर्ती के वक्त उनकी योग्यता की जांच नहीं की गई थी? केंद्र सरकार को शिक्षकों के सम्मान की रक्षा के लिए तत्काल अध्यादेश लाना चाहिए और नई पीढ़ी के निर्माताओं की भूमिका को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।”

न्यायालय के आदेशों का पालन करेगी सरकार

कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों पर पलटवार करते हुए भाजपा प्रवक्ता दुर्गेश केशवानी ने कहा: “हमारी सरकार न्यायालय के आदेशों का अक्षरशः पालन करने का काम करती है। हमारी सरकार पूरी तरह से अधिकारी, कर्मचारी और शिक्षक हितैषी है। शिक्षकों की ओर से जो भी मांगें आई हैं, सरकार ने उन्हें बैठकर ध्यानपूर्वक सुना है और उनके हित में ही निर्णय ले रही है। कांग्रेस का काम केवल आरोप और आलोचना करना रह गया है; देश की जनता और शिक्षक उससे पूरी तरह विमुख हो चुके हैं। शिक्षकों के लिए जो भी न्यायसंगत और जरूरी होगा, हमारी सरकार वही करेगी।”

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