प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया इंस्टाग्राम वीडियो संदेश को लेकर कांग्रेस ने उन पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ कटु भाषा का इस्तेमाल करते हैं, झूठ फैलाते हैं और अब “विक्टिम कार्ड” खेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश कई अहम मुद्दों पर प्रधानमंत्री से जवाब और माफी की उम्मीद कर रहा है।
जयराम रमेश का आरोप: विरोधियों पर कटु भाषा और झूठ का इस्तेमाल
शनिवार (1 अगस्त) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पूर्ववर्तियों और राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ लगातार आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री सार्वजनिक सभाओं और संसद दोनों जगहों पर गलत जानकारी फैलाते हैं और उनके समर्थकों द्वारा की जाने वाली अभद्र भाषा को भी संरक्षण मिलता है।
पेपर लीक और छात्र आंदोलनों पर माफी की मांग
कांग्रेस नेता ने कहा कि देश के लाखों युवा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कथित पेपर लीक से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलनों के दौरान गृह मंत्रालय के संरक्षण में कठोर कार्रवाई की गई। रमेश ने कहा कि इन घटनाओं के लिए प्रधानमंत्री को देश के युवाओं से माफी मांगनी चाहिए।
राम मंदिर ट्रस्ट और नोटबंदी का भी किया जिक्र
जयराम रमेश ने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित चंदा अनियमितता के आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मामले पर भी प्रधानमंत्री को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 5 फरवरी 2020 को प्रधानमंत्री ने लोकसभा में राम मंदिर ट्रस्ट की घोषणा की थी।
इसके अलावा उन्होंने 8 नवंबर 2016 की नोटबंदी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस फैसले से करोड़ों लोगों की आजीविका प्रभावित हुई और बड़ी संख्या में MSME इकाइयों को नुकसान झेलना पड़ा। कांग्रेस का दावा है कि इन मुद्दों पर भी प्रधानमंत्री को देश से माफी मांगनी चाहिए।
‘इंस्टाग्राम सभाएं लोगों को प्रभावित नहीं कर सकतीं’
जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री के हालिया इंस्टाग्राम वीडियो संदेश पर निशाना साधते हुए कहा कि युवाओं को “माफ करने” वाला बयान उन लोगों का अपमान है जिन्होंने विभिन्न सरकारी नीतियों के कारण कठिनाइयों का सामना किया। उन्होंने कहा कि देश न्याय और जवाबदेही चाहता है तथा अब केवल सोशल मीडिया संदेशों से जनता को प्रभावित नहीं किया जा सकता।


